गुरुग्राम। अडानी रियल एस्टेट कंपनी के मैनेजर युवराज सिंह मानचंदा की हत्या की जांच में पुलिस को हथियार के इंतजाम से जुड़ी अहम कड़ी मिली है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, युवराज की पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स ने हत्या से करीब तीन महीने पहले उत्तर प्रदेश के एक पुलिसकर्मी से लगभग 2 लाख रुपये में हथियार खरीदा था। इस मामले में हथियार उपलब्ध कराने वाले पुलिसकर्मी को भी गिरफ्तार किया गया है।
जांच के अनुसार, युवराज और आन्या के बीच करीब एक करोड़ रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस का आरोप है कि इसी विवाद के चलते आन्या ने अपने लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा के साथ मिलकर युवराज को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। हथियार की पहले से व्यवस्था किए जाने के बाद युवराज को गुरुग्राम बुलाया गया और कथित तौर पर उसकी हत्या कर दी गई।
सोमवार को दिल्ली पुलिस की टीम दोनों आरोपियों को लेकर गुरुग्राम पहुंची और वारदात से जुड़े स्थानों पर सीन री-क्रिएट कराया। पुलिस ने द्वारका एक्सप्रेसवे से लेकर सेक्टर-65 और सेक्टर-70 तक उन जगहों का जायजा लिया, जहां आरोपियों की गतिविधियां सामने आई थीं। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान आरोपियों से गोली चलाने, हथियार छिपाने और शव को नाले में डालने से जुड़ी जानकारी ली गई। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
बहन के साथ खरीदारी के बाद गायब हुआ था युवराज
युवराज 6 सितंबर को अपनी बहन के साथ दिल्ली के लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में शादी की खरीदारी के लिए गया था। इसके बाद दोनों के-ब्लॉक स्थित गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट पहुंचे। शाम करीब 4 बजे युवराज ने गुरुग्राम में एक मीटिंग के लिए जाने की बात कही थी और रात तक लौटने का भरोसा दिया था। लेकिन इसके बाद उसका परिवार से संपर्क टूट गया और मोबाइल भी बंद मिला।
कई दिनों तक उसका पता नहीं चलने पर बहन हरसिमरन ने लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को युवराज की आन्या वत्स से बातचीत के बारे में जानकारी मिली। परिवार ने भी पुलिस को बताया था कि युवराज ने गुरुग्राम में आन्या से मिलने की बात कही थी।
मोबाइल बंद मिला तो उत्तराखंड तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने आन्या की तलाश शुरू की तो उसका मोबाइल बंद मिला। बाद में नए सिम कार्ड की जांच से उसकी लोकेशन उत्तराखंड में मिली। दिल्ली पुलिस ने वहां कार्रवाई करते हुए आन्या और उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों की कथित भूमिका और हथियार की व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सामने आने का दावा किया।
इस बीच युवराज का शव 10 सितंबर को गुरुग्राम पुलिस को मिला था। दिल्ली पुलिस ने 11 सितंबर को युवराज की गुमशुदगी की जानकारी अंतर-राज्यीय पुलिस पोर्टल पर दर्ज की थी। आरोप है कि गुरुग्राम पुलिस ने शव से संबंधित जानकारी 16 सितंबर को अपलोड की, वह भी ‘अज्ञात शव’ के बजाय ‘अज्ञात व्यक्ति’ की श्रेणी में। पुलिस रिकॉर्ड में इस अंतर के कारण दोनों मामलों का मिलान समय पर नहीं हो सका।
पुलिस ने 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। मामले में बादशाहपुर थाने के जांच अधिकारी सुहेल खान को निलंबित किया जा चुका है। फिलहाल युवराज हत्याकांड की जांच दिल्ली की लाजपत नगर थाना पुलिस कर रही है।
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