पश्चिम बंगाल के बजट को लेकर भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है. शुक्रवार (6 फरवरी, 2026) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार के ताजा बजट में विकास, विज्ञान और उद्योग को नजरअंदाज कर मदरसों, मौलवियों और अल्पसंख्यक संस्थानों को असमान रूप से भारी धनराशि आवंटित की गई है. उन्होंने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया.

आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि एक ओर देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, जिसकी झलक हालिया केंद्रीय बजट में दिखती है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल ममता बनर्जी के नेतृत्व में तुष्टिकरण की गहरी खाई में गिरता जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि बंगाल बजट में अल्पसंख्यक और मदरसा मद के लिए करीब 5,713 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जबकि उद्योग और वाणिज्य के लिए सिर्फ 1,400 करोड़ रुपए, सूचना प्रौद्योगिकी के लिए 217 करोड़ रुपए और विज्ञान एवं शोध के लिए महज 82 करोड़ रुपए रखे गए हैं.

उन्होंने कहा कि यह वही पश्चिम बंगाल है, जहां से सत्येंद्र नाथ बोस, जगदीश चंद्र बोस और अमल कुमार राय चौधरी जैसे महान वैज्ञानिक निकले. इसके बावजूद विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सीमित धनराशि देना राज्य की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने उत्तर और पश्चिम बंगाल के विकास के लिए क्रमशः 920 करोड़ और 810 करोड़ रुपए के आवंटन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह समग्र विकास की जरूरतों की तुलना में अपर्याप्त है.

डॉ. त्रिवेदी ने यह भी आरोप लगाया कि बजट में केवल मदरसों के लिए ही नहीं, बल्कि मौलवियों और मुअज्जिनों (जो मस्जिदों में अजान देते हैं) के लिए भी प्रावधान किए गए हैं. उन्होंने दावा किया कि इन भुगतानों के लिए आवासीय या स्थायी पते के प्रमाण की अनिवार्यता नहीं रखी गई है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के पुराने बयानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भट्टाचार्य ने 2006 में कुछ अमान्य (अनरिकॉग्नाइज्ड) मदरसों को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का केंद्र बताया था और पाकिस्तान की आईएसआई से प्रायोजित होने के आरोप लगाए थे. डॉ. त्रिवेदी ने सवाल किया कि यदि ऐसे आरोपों के बावजूद मदरसों को बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता दी जा रही है, तो क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भावना की कीमत पर राजनीति नहीं है.

भाजपा सांसद ने कहा कि ममता बनर्जी सरकार ने मुस्लिम समाज की 87 में से 78 जातियों को ओबीसी का दर्जा दिया और अब बजट के जरिए वित्तीय सहायता भी बढ़ा दी है. उन्होंने मुख्यमंत्री के हालिया बयान का हवाला देते हुए पूछा कि क्या यह धनराशि प्यार से दी जा रही है या डर के माहौल में, जैसा कि रोड रेस से जुड़े बयान में संकेत मिला था.

उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ तृणमूल कांग्रेस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कथित तौर पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने वाले गठबंधनों की भी विफलता है. उन्होंने सवाल उठाया कि ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा देने वाली सरकार ने राज्य के समग्र विकास की बजाय एक वर्ग विशेष पर इतना बड़ा खर्च क्यों किया और क्या यह बंगाल की जनता के साथ अन्याय नहीं है. डॉ. त्रिवेदी ने ममता बनर्जी से सीधे सवाल करते हुए कहा कि 5,700 करोड़ रुपए मदरसा और मौलवी मद में देने के पीछे क्या तर्क है और राज्य के विकास, विज्ञान तथा उद्योग को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई.

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