कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में महासप्तमी की रात हुई खौफनाक त्रासदी, यह सिर्फ एक बेहद दर्दनाक खबर नहीं बल्कि सैकड़ों परिवारों के कभी न भरने वाले जख्मों का दर्दनाक गवाह बन चुकी है. हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई, मरने वालों में दो बच्चे भी शामिल हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सभी कार्यक्रम रद्द. कर सकते हैं घायलों से मुलाकात.
उत्तर कोलकाता में दुर्गा पूजा के एक पंडाल में शनिवार को भगदड़ में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गयी और 25 अन्य लोग घायल हो गए.
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में शनिवार शाम चोरबागान दुर्गा पंडाल में भगदड़ मच गई. इस भयानक हादसे में कुचलने से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 20 हो गया है. इनमें से 6 लोगों की पहचान हो गई है. जबकि 25 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर कोलकाता के एक दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना के बाद रविवार को पश्चिम बंगाल में होने वाले अपने सभी निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं. वह रविवार को अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात करेंगे.
अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के बाद कई लोगों के हताहत होने की बेहद दुखद खबर मिली है. शाह ने पोस्ट में कहा, “मैं कल पश्चिम बंगाल में अपने सभी निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर रहा हूं, ताकि अस्पताल में घायलों से मुलाकात कर सकूं.
हादसे के बाद अस्पताल और पुलिस प्रशासन ने मृतकों की शिनाख्त की प्रक्रिया तेज कर दी है. प्रशासनिक बयानों के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वालों में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं. मृतकों में 6 की पहचान हुई है-
- श्रीपर्णा पोद्दार (27 वर्ष)- निवासी बैद्यबाती.
- आरती सरकार विश्वास- निवासी चकदाहा.
- प्रिया समद्दर- निवासी न्यू बैरकपुर.
- मिठू पाल- निवासी कुमारटुली.
- तानिया विश्वास- निवासी न्यूटाउन.
- शुभम सोनकर- निवासी चोरबागान (स्थानीय).
घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी, मुख्य सचिव और स्वास्थ्य मंत्री के साथ देर रात अस्पताल और घटनास्थल पहुंचे. मुख्यमंत्री के निर्देश पर चोरबागान पूजा समिति के 5 मुख्य आयोजकों समेत कुल 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है.
मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने बताया कि रात करीब 8:20 बजे एसीपी से मिली सूचना के अनुसार पंडाल में माइक पर की गई एक घोषणा के बाद अचानक भीड़ में अफरा-तफरी मच गई.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हजारों पुलिसकर्मियों और स्वयंसेवकों की मौजूदगी के बावजूद कोई एम्बुलेंस या सही आपातकालीन इंतजाम नहीं थे. स्थानीय लोगों ने खुद गाड़ियों और हाथों से घायलों को अस्पताल पहुंचाया.
वहीं, प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिजनों ने उस भयानक रात की जो आपबीती सुनाई है, उसे सुनकर किसी की भी रूह कांप उठेगी. अगरपारा से माता-पिता के साथ खुशियां मनाने आई 13 साल की बच्ची की सांसें पंडाल की अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई. 13 वर्षीय प्रांजल के चाचा ने रोते हुए बताया कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो वहां लाशों की लंबी कतारें लगी थीं.
राज्य सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को ‘ग्रुप-डी’ की सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है. घायलों को 5-5 लाख रुपये की मदद दी जाएगी और उनके इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी.
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