रायपुर. प्रदेश के शिक्षाकर्मियों की नौकरी आये दिन दाव पर लगी हुई है, कभी उन्हें संविलियान की मांग को लेकर आंदोलन के चलते नौकरी से बर्खास्त किया जा रहा है तो कभी उन्हें कई कई महिनो तक वेतन का भुगतान नही किया जा रहा है तो कभी इन शिक्षाकर्मियों से शिक्षा की जगह दूसरे कम कराया जाता है. इसके अलावा मूत्रालय के इंस्पेक्शन, पुलिस वैरिफिकेशन, डायरेक्टरेट में आने पर बैन, ग्रुप में कमेट करने ने शो कॉज नोटिस दिये जाने जैसे अजीबो गरीब आदेश भी पिछले कुछ महिनों में शिक्षाकर्मियों के लिए जारी किये गये हैं.

इसके बाद भी जब सरकार का मन नही भरा तो अब सरकार ने एक और तुगलकी फरमान जारी कर दिया है. जिसमें कहा गया है कि जो शिक्षाकर्मी 8 किलोमीटर से अधिक दूरी से स्कूल आते है तो उन्हें वेतन नहीं दिया जायेगा! हांलाकि इस आदेश में वेतन काटे जाने का उल्लेख नहीं है लेकिन शासन की ओर से जारी आदेश का अभिप्राय यही है. वही शासन की ओर से जारी इस आदेश को लेकर शिक्षाकर्मियों में खासा आक्रोश है.

 

राजनांदगांव जिले मानपुर पंचायत सीईओ की ओर से यह आदेश जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि जो भी शिक्षक या शिक्षाकर्मी स्कूल 8 किलोमीटर से अधिक दूरी से आते हैं, उनकी अटेंडेंस पे डाटा पर हस्ताक्षर ना करें. यह आदेश सभी सरपंच और सचिवों को जारी किया गया है साथ ही इस तुगलकी आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर, राजनांदगांव जिला पंचायत सीईओ और एसडीओ मोहला को भी भेजा गया है.

संजय शर्मा, प्रांतीय संचालक, छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा

इस तुगलकी फरमान जारी होने के बाद शिक्षाकर्मियों में खासा आक्रोश है. छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के प्रांतीय संचालक संजय शर्मा ने कहा कि “एक बार फिर शिक्षाकर्मियों को परेशान करने की मंशा से सीईओ जनपद पंचायत मानपुर के द्वारा ऐसा ही आदेश जारी किया गया है. इस आदेश से यह भी पता चलता है कि अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से कोई लेना-देना है बल्कि उनकी मंशा कहीं ना कहीं शिक्षाकर्मियों को परेशान करने की ज्यादा है, कोई शिक्षक कहां रहेगा यह उसका विशेषाधिकार है और वह अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से अपने निवास स्थान का चयन करता है. यदि शिक्षा में उसके द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है तो उस पर कार्यवाही की जाए न कि ऐसा तुगलकी फरमान जारी किया जाए. शिक्षाकर्मी संघ इस आदेश की कड़ी निंदा करता है”

विवेक दुबे, मीडिया प्रभारी, छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा

वहीं मीडिया प्रभारी विवेक दुबे ने कहा है कि “लग रहा है जैसे अधिकारियों में तुगलकी फरमान निकालने की होड़ सी मची है एक तो बायोमेट्रिक सिस्टम लगने के बाद भी सरपंच, सचिव से हस्ताक्षर लेने के बाद ही वेतन जारी होने का नियम ही गलत है और इसे समाप्त करने की हमने मांग भी की थी, उसके लिए तो आदेश जारी हुआ नहीं बल्कि इसके ठीक उलट अब सीईओ ने शिक्षाकर्मियों को परेशान करने की मंशा से यह आदेश जारी किया है. देश का कोई भी कर्मचारी अपने आर्थिक स्थिति और अपने परिवार की सुविधा को देखते हुए निवास स्थान का चयन करता है और यह उसका विशेषाधिकार है और इस प्रकार का आदेश जारी कर सीधे-सीधे उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है हमारा संघ इस आदेश का पुरजोर विरोध करता है और यदि यह आदेश वापस नहीं लिया जाता है तो फिर संघ आगे कठोर कदम उठाने को मजबूर होगा”