कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से साइबर अपराध का एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। इसे प्रदेश के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी बताया जा रहा है। जालसाजों ने ग्वालियर के एक 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव अधिकारी अशोक विजयवर्गीय को अपने जाल में फंसाकर 21 करोड़ 05 लाख 96 हजार रुपये की चपत लगा दी। शातिर ठगों ने पीड़ित को क्रिप्टो और ऑनलाइन ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर इस अंधी ठगी को अंजाम दिया।

व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ खेल, 218 दिनों तक बुना जाल

ठगी का यह पूरा खेल कोई दो-चार दिन में नहीं, बल्कि पूरे 218 दिनों तक सुनियोजित तरीके से चला। इस डिजिटल डकैती की शुरुआत 01 दिसंबर 2025 को एक व्हाट्सएप कॉल से हुई थी, जो 07 जुलाई 2026 तक लगातार जारी रही। ठगों ने बुजुर्ग सीए को इस कदर अपने मनोवैज्ञानिक जाल में फंसाए रखा कि उन्हें भनक तक नहीं लगने दी।

पहले दिया ₹88 हजार का ‘लालच’

शुरुआत में ठगों ने अशोक विजयवर्गीय से महज 1 लाख रुपये का निवेश करवाया। विश्वास जीतने के लिए उन्होंने तुरंत इस पर 88 हजार रुपये का मुनाफा भी लौटा दिया। इस मुनाफे को देखकर सीए जालसाजों के चंगुल में पूरी तरह फंस गए और आगे बड़ा निवेश करने के लिए तैयार हो गए।

106 बार में 25 बैंक खातों में ट्रांसफर कराई रकम

जैसे-जैसे सीए का भरोसा बढ़ता गया, ठगों ने उनसे मोटी रकम ऐंठना शुरू कर दिया। शातिर अपराधियों ने पीड़ित से 106 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹21.05 करोड़ ट्रांसफर करवा लिए। यह पूरी रकम देश के 25 अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई। जांच में सामने आया है कि मुख्य रूप से 15 बैंक खातों में 10.84 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए, जबकि बाकी के करोड़ों रुपये अन्य खातों में भेजे गए।

₹33.25 करोड़ का फर्जी पोर्टफोलियो दिखाकर भ्रमित

ठगों ने पीड़ित को झांसा देने के लिए एक फर्जी ऑनलाइन पोर्टफोलियो तैयार कर रखा था। इस स्क्रीन पर पीड़ित को उनका निवेश बढ़कर 33.25 करोड़ रुपये दिखाई दे रहा था, जिसमें 12 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज था। इस फर्जी आंकड़े को देखकर पीड़ित लगातार पैसे लगाता रहा।

रकम निकालने की कोशिश की तो मांगी करोड़ों की फीस

इस महाठगी का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित सीए ने अपने मुनाफे की रकम को बैंक खाते में निकालने (Withdraw) की कोशिश की। इस पर ठगों ने रकम रिलीज करने के एवज में टैक्स और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर करोड़ों रुपये की और मांग शुरू कर दी। तब जाकर पीड़ित को अहसास हुआ कि वे एक बहुत बड़े फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं।

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