Business Desk : भारतीय शेयर बाजार में Foreign Portfolio Investors (FPIs) की बिकवाली एक बार फिर बढ़ गई है। जुलाई और अगस्त में भारतीय इक्विटी में खरीदारी करने के बाद सितंबर में विदेशी निवेशकों का रुख पलट गया। 19 सितंबर तक FPIs ने भारतीय शेयरों से करीब ₹23,676 करोड़ निकाल लिए थे।
इसके बाद 25 सितंबर को भी विदेशी निवेशकों ने इक्विटी में ₹4,521.96 करोड़ की नेट बिकवाली की। CDSL के आंकड़ों के मुताबिक 25 सितंबर को भी इक्विटी सेगमेंट में विदेशी निवेशक शुद्ध विक्रेता रहे।
NSE CEO ने AI Rally को बताया बड़ी वजह
FPI Outflow के बीच NSE के MD और CEO आशीष चौहान ने विदेशी निवेशकों के पैसे निकालने की एक अहम वजह बताई है। उनके मुताबिक दुनिया के फंड मैनेजर अलग-अलग बाजारों में चल रहे investment cycles के हिसाब से अपना पैसा एक बाजार से दूसरे बाजार में शिफ्ट करते रहते हैं।
चौहान के मुताबिक इस समय Artificial Intelligence (AI) Rally ने अमेरिका के साथ दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों को आकर्षित किया है। AI और semiconductor कंपनियों से जुड़े बाजारों में तेजी के कारण वैश्विक फंड का एक हिस्सा इन बाजारों की तरफ गया है।
क्या AI की वजह से ही भारत से निकल रहा पैसा?
यहां यह समझना जरूरी है कि AI Rally अकेली वजह नहीं है। आशीष चौहान ने इसे अपना व्यक्तिगत बाजार आकलन बताया है, NSE का आधिकारिक अनुमान नहीं। उनके मुताबिक मौजूदा AI-led cycle के खत्म होने के बाद विदेशी पूंजी का कुछ हिस्सा दोबारा भारत की ओर आ सकता है।
दूसरी ओर, RBI ने सितंबर में FPI फ्लो के कमजोर होने के पीछे पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी जैसे कारकों को भी प्रमुख कारणों में शामिल किया है। यानी विदेशी निवेशकों के फैसले पर एक साथ कई global factors असर डाल रहे हैं।
जुलाई-अगस्त में भारत में पैसा लगा रहे थे FPIs
सितंबर से पहले विदेशी निवेशकों का रुख कुछ अलग था। आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में FPIs ने भारतीय इक्विटी में करीब ₹11,045 करोड़ और अगस्त में करीब ₹10,231 करोड़ का निवेश किया था। यानी दो महीने की खरीदारी के बाद सितंबर में अचानक बिकवाली का दबाव बढ़ा।
वैश्विक स्तर पर भी निवेशक AI और टेक्नोलॉजी से जुड़े बाजारों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अगस्त में एशियाई शेयर बाजारों में विदेशी निवेश लौटा था और ताइवान जैसे AI-linked बाजारों में मजबूत विदेशी खरीदारी देखने को मिली थी।
25 सितंबर को कितना पैसा निकाला?
CDSL के 25 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में ₹13,745.13 करोड़ की खरीदारी की, जबकि ₹18,267.09 करोड़ की बिक्री की। इस तरह उस दिन नेट आउटफ्लो ₹4,521.96 करोड़ रहा। डेट सेगमेंट में भी विदेशी निवेशक शुद्ध विक्रेता रहे। इससे साफ है कि सितंबर में FPI selling सिर्फ एक-दो कारोबारी सत्र तक सीमित नहीं रही है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और तेल भी बढ़ा रहे दबाव
विदेशी निवेशक आमतौर पर सिर्फ भारतीय शेयरों का प्रदर्शन देखकर फैसला नहीं करते। US Bond Yield, Crude Oil Prices, Rupee Movement, Interest Rate Outlook और Geopolitical Tensions जैसे factors भी उनके asset allocation को प्रभावित करते हैं।
हाल के हफ्तों में ऊंची बॉन्ड यील्ड और महंगे तेल ने वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ाया है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में भी ऊंची यील्ड और तेल की कीमतों के बीच equity funds से निकासी देखने को मिली।
भारत में कब लौट सकता है विदेशी पैसा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि FPI Buying कब वापस आएगी? इसका कोई निश्चित समय बताना संभव नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि AI-led rally आगे कितनी मजबूत रहती है, वैश्विक बॉन्ड यील्ड किस दिशा में जाती है, कच्चे तेल की कीमत क्या रहती है और भारत के शेयरों का valuation विदेशी निवेशकों को कितना आकर्षक लगता है।
आशीष चौहान के मुताबिक मौजूदा FPI outflow को cyclical movement के तौर पर देखा जा सकता है। उनका अनुमान है कि AI cycle कमजोर पड़ने पर विदेशी पूंजी का कुछ हिस्सा भारत लौट सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए FPI flow, रुपये, crude oil और global bond yields ऐसे प्रमुख संकेतक हैं, जिन पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
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