पटना। गया और औरंगाबाद के सीमावर्ती इलाकों में पिछले दस वर्षों से फरार एक नक्सली को पुलिस ने पकड़ा है। पुलिस ने कुख्यात नक्सली दारा यादव को दबोच लिया। स्थानीय लोगों की मानें तो दारा की गिरफ्तारी उनके लिए राहत की सांस की तरह है क्योंकि वह वर्षों से गांवों में दहशत का पर्याय बन चुका था। कई परिवार उसकी वजह से पलायन कर चुके थे।
गांव में छिपकर काट रहा था वक्त
डुमरिया थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि दारा यादव ढिबरा थाना क्षेत्र के बिशुनपुर गांव के पास छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही दोनों जिलों की पुलिस एक साथ हरकत में आई और गांव को चारों ओर से घेर लिया। पुलिस को देखते ही दारा ने भागने की कोशिश की, लेकिन इस बार किस्मत ने साथ नहीं दिया। बिना किसी झड़प के उसे दबोच लिया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि दारा कई दिनों से आसपास मंडराता देखा जा रहा था, पर डर की वजह से कोई बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
पूछताछ में खुद कबूले कई अपराध
गिरफ्तारी के बाद जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने कई नक्सली वारदातों में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली। हत्या, विस्फोटक सामग्री का उपयोग, हथियारों की सप्लाई और नक्सली हमलों की योजना इन सभी संगीन मामलों में दारा लंबे समय से वांछित था। पुलिस की फाइलों में उसका नाम सबसे खतरनाक नक्सलियों की सूची में दर्ज था।
एक बड़ी सफलता
गया के एसएसपी आनंद कुमार ने कहा कि जिले में नक्सलियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। दारा यादव का पकड़ा जाना इस अभियान की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि दारा को सभी कानूनी प्रक्रियाओं के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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