रायपुर। छत्तीसगढ़ के ईओडब्ल्यू–एसीबी प्रमुख और रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा को आतंकवाद-रोधी अभियानों में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में आयोजित आतंकवाद निरोधी सम्मेलन के दौरान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। सम्मेलन का आयोजन केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने किया था।

सम्मेलन के मंच से एनआईए में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान अमरेश मिश्रा की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। आतंकवाद से जुड़े संवेदनशील मामलों की जांच, अंतर-एजेंसी समन्वय और ठोस कानूनी कार्यवाही में उनकी भूमिका निर्णायक रही। यही कारण है कि उनकी सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला।

केंद्रीय अनुभव, राज्य में सख्त अमल

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमरेश मिश्रा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान एनआईए में रहकर कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच से जुड़े रहे। उन्हें उनकी कार्यशैली को लेकर पहले भी केंद्र सरकार की सराहना मिल चुकी है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस छत्तीसगढ़ लौटने के बाद अमरेश मिश्रा को रायपुर रेंज आईजी की जिम्मेदारी सौंपी गई और इसके बाद उन्हें ईओडब्ल्यू-एसीबी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। जब उन्हें ईओडब्ल्यू–एसीबी की जिम्मेदारी सौंपी गई, तब राज्य में कई बड़े घोटाले राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में थे।

ईओडब्ल्यू–एसीबी का बढ़ता दायरा

अमरेश मिश्रा के नेतृत्व में ईओडब्ल्यू–एसीबी का तेवर और कार्यक्षेत्र दोनों बदले। साल 2024 में एसीबी ने रिश्वतखोरी के 44 प्रकरण दर्ज किए और 20 ठिकानों पर तलाशी ली। वहीं ईओडब्ल्यू ने 9 मामलों में 90 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की। इस तरह 2024 में कुल 110 से अधिक ठिकानों पर कार्रवाई हुई।

साल 2025 में कार्रवाई और तेज हुई। एसीबी ने 60 प्रकरण दर्ज कर 44 स्थानों पर तलाशी ली, जबकि ईओडब्ल्यू ने 10 मामलों में 120 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे। केवल 2025 में ही अब तक 160 से ज्यादा ठिकानों पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई दर्ज की जा चुकी है।

बड़े घोटालों में लगातार अभियोग पत्र

ईओडब्ल्यू–एसीबी ने 2024–25 के दौरान ऑनलाइन सट्टा, आबकारी, कोल, डीएमएफ, राइस मिलिंग, तेंदूपत्ता और भर्ती परीक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में व्यापक कार्रवाई की। महादेव ऑनलाइन सट्टा एप प्रकरण में दो अभियोग पत्र दाखिल कर 14 आरोपियों को नामजद किया गया। 30 ठिकानों पर छापेमारी के बाद यह मामला राज्य सरकार की सिफारिश पर सीबीआई को सौंपा गया।

आबकारी घोटाले में अब तक छह अभियोग पत्र दाखिल किए गए हैं, जिनमें 51 आरोपी बनाए गए हैं। करीब 80 ठिकानों पर तलाशी हुई है। कोल घोटाले में चार अभियोग पत्रों के जरिए 20 आरोपियों पर कार्रवाई की गई है। डीएमएफ प्रकरण में 9 आरोपियों के खिलाफ अभियोग पत्र दाखिल कर 23 ठिकानों पर छापेमारी की गई। राइस मिलिंग और तेंदूपत्ता प्रकरणों में भी अभियोग पत्र प्रस्तुत कर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है। वहीं पटवारी से राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा घोटाले में 2025 में मामला दर्ज कर करीब 20 स्थानों पर तलाशी ली गई।

आय से अधिक संपत्ति पर कड़ा संदेश

ईओडब्ल्यू–एसीबी ने आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी कड़ा रुख अपनाया है। आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई, रानू साहू, आईएफएस अधिकारी अशोक कुमार पटेल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पूर्ववर्ती सरकार में प्रभावशाली भूमिका में रहीं सौम्या चौरसिया के विरुद्ध की गई कार्रवाई को एजेंसी की अब तक की सबसे बड़ी जांच मानी जा रही है। जांच में उनकी ज्ञात आय से करीब 1800 गुना अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ, जिसे अभियोग पत्र में शामिल किया गया।

पुराने मामलों में भी गति

वर्ष 2025 में ब्यूरो ने 1995, 2013 और 2016 से लंबित मामलों में भी चालानी कार्रवाई कर वर्षों पुराने प्रकरणों को फिर से सक्रिय किया है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला है कि अब जांच एजेंसियां न केवल नए मामलों, बल्कि लंबे समय से अटकी फाइलों पर भी सख्ती से आगे बढ़ रही हैं।

ड्रग तस्करी का नेटवर्क फूटा

रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार पर बड़ी कार्रवाई की है। विशेष अभियानों में रायपुर और आसपास के इलाके में सक्रिय ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ और कई आरोपी गिरफ्तार किए गए। कार्रवाई के दौरान MDMA, हेरोइन और अन्य प्रतिबंधित नशीले पदार्थ बरामद किए गए। जांच में पता चला कि यह नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था और सप्लाई बड़े शहरों तक फैली थी। आईजी मिश्रा के निर्देश पर NDPS एक्ट की सख्त धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि तस्करों के वित्तीय लेन-देन और पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है।

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