प्रतीक चौहान. रायपुर. अपने आदेशों और कारनामों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले आरपीएफ डीआईजी मोहम्मद शाकिब एक बार फिर सुर्खियों में है. चंद दिनों पहले डीआईजी ने एक कोयला चोरों के खिलाफ एक विशेष ड्राइव चलाने के निर्देश दिए. जिसके बाद बिलासपुर आरपीएफ कमांडेंट ने कंट्रोल ऑर्डर निकाला और कार्रवाई करने के आदेश दिए.
ये संभवतः ये ड्राईव आरपीएफ अधिकारियों को ट्रैप में लेने का एक पैतरा था, जिसमें करीब आधा दर्जन से अधिक इंस्पेक्टर फंस गए है. ड्राइव चलाने के आदेश के बाद इंस्पेक्टरों ने आनन-फानन में कोयला चोरों पर कार्रवाई कर अपनी नौकरी बचाने की कोशिश की. लेकिन कार्रवाई के बाद डीआईजी ने एक दूसरा आदेश निकाल दिया, जिसमें ये कहा गया कि विभिनन्न थानाक्षेत्रों में इंस्पेक्टरों की कोयला चोरों को लेकर मौन स्वीकृति है और उनसे इस संबंध में जवाब मांगा गया है.

अब सवाल ये है कि यदि डीआईजी समेत अन्य जोनल अधिकारियों को विभिन्न थानाक्षेत्रों में कोयला चोरी की जानकारी मिल रही है तो वे अपनी जोनल सीआईबी और आईवीजी को भेजकर इस मामले में जांच क्यों नहीं करवा रहे है ?
उच्च पदस्थ सूत्र बताते है कि डीआईजी और बिलासपुर आरपीएफ कमांडेंट के निर्देश के बाद 12 कोयला चोरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. ये भी जांच का विषय है कि क्या इन विभिन्न थानाक्षेत्रों में कोयला चोरों को इंस्पेक्टरों की मौन स्वीकृति है ? लेकिन अब कोयला चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले तमाम इंस्पेक्टरों का बीपी बढ़ा हुआ है कि वे डीआईजी को क्या जवाब देंगे!
ड्राईव के दौरान कहां-कहां हुए केस दर्ज ?
- मनेंद्रगढ़ – 3 केस
- बिलासपुर – 2 केस
- कोरबा – 1 केस
- चांपा – 1 केस
- रायगढ़ – 1 केस
- शहडोल – 1 केस
- अनूपपुर – 1 केस
- बृजराजनगर – 1 केस
- अंबिकापुर – 1 केस


