काशी के मणिकर्णिका घाट के ये बड़े रहस्य, जानकर रह जाएंगे दंग
काशी के मणिकर्णिका घाट के ये बड़े रहस्य, जानकर रह जाएंगे दंग
कार्तिक शुक्ल की चतुर्दशी अर्थात बैकुंठ चतुर्दशी और वैशाख माह में स्नान करने का खासा महत्व है
कार्तिक शुक्ल की चतुर्दशी अर्थात बैकुंठ चतुर्दशी और वैशाख माह में स्नान करने का खासा महत्व है
स्नान
स्नान
इस घाट में 3000 साल से भी ज्यादा समय से ये कार्य होते आ रहा है
इस घाट में 3000 साल से भी ज्यादा समय से ये कार्य होते आ रहा है
श्मशान घाट
श्मशान घाट
मणिकर्णिका घाट में चैत्र नवरात्री की अष्टमी के दिन वैश्याओं का विशेष नृत्य का कार्यक्रम होता है
मणिकर्णिका घाट में चैत्र नवरात्री की अष्टमी के दिन वैश्याओं का विशेष नृत्य का कार्यक्रम होता है
वैश्याओं का नृत्य
वैश्याओं का नृत्य
मणिकर्णिका घाट में फाल्गुन माह की एकादशी के दिन चिता की राख से होली खेली जाती है
मणिकर्णिका घाट में फाल्गुन माह की एकादशी के दिन चिता की राख से होली खेली जाती है
चिता की राख से होली
चिता की राख से होली
कहते हैं कि यहां पर माता सती के कान का कुंडल गिरे थे इसीलिए इसका नाम मणिकर्णिका है
कहते हैं कि यहां पर माता सती के कान का कुंडल गिरे थे इसीलिए इसका नाम मणिकर्णिका है
शक्तिपीठ है यहां पर
शक्तिपीठ है यहां पर
यह भी कहा जाता है कि भगवान् भोलेनाथ जी द्वारा यही पर माता सती जी का अंतिम संस्कार किया था
यह भी कहा जाता है कि भगवान् भोलेनाथ जी द्वारा यही पर माता सती जी का अंतिम संस्कार किया था
माता सती का अंतिम संस्कार
माता सती का अंतिम संस्कार
माता पार्वती ने मणिकर्णिका घाट को क्यों दिया था श्राप, जहां 24 घंटे जलती हैं चिताएं
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