गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के अवसर पर दिल्ली सरकार ने जेलों में बंद पात्र कैदियों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है. दिल्ली सरकार ने दोषसिद्ध कैदियों को विशेष सरकारी माफी (स्पेशल रिमिशन) देने का निर्णय लिया है, जिससे उनकी सजा की अवधि में कटौती होगी. यह फैसला संविधान और कानून के दायरे में रहते हुए मानवीय और सुधारात्मक न्याय की भावना को ध्यान में रखकर लिया गया है.

दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने जानकारी देते हुए बताया कि यह विशेष माफी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 473 के तहत दी जा रही है, जो पहले की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 के समान है. साथ ही यह फैसला गृह मंत्रालय की साल 1974 की अधिसूचना के अनुरूप है. इसका उद्देश्य उन कैदियों को राहत देना है, जिन्होंने जेल में रहते हुए अच्छा आचरण दिखाया है.

गृह मंत्री के अनुसार, यह माफी उन दोषसिद्ध कैदियों पर लागू होगी, जिन्हें दिल्ली के आपराधिक न्यायालयों ने सजा सुनाई है और जो 26 जनवरी 2026 को दिल्ली की जेलों में या दिल्ली से बाहर की जेलों में सजा काट रहे हैं. शर्त यह है कि कैदी निर्धारित नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करते हों.

पैरोल या फरलो के कैदियों को भी मिलेगा योजना का लाभ

सरकार ने बुजुर्ग और महिला कैदियों को विशेष प्राथमिकता दी है. 65 साल से अधिक आयु के कैदी और महिला कैदी यदि 10 साल से अधिक की सजा काट रहे हैं तो उन्हें 90 दिन की माफी मिलेगी. 5 से 10 साल की सजा पर 60 दिन, 1 से 5 साल की सजा पर 30 दिन और 1 साल तक की सजा पर 20 दिन की माफी दी जाएगी. वहीं अन्य कैदियों के लिए 10 साल से अधिक की सजा पर 60 दिन, 5 से 10 साल पर 45 दिन, 1 से 5 साल पर 30 दिन और 1 साल तक की सजा पर 15 दिन की माफी तय की गई है.

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह माफी दिल्ली जेल नियम, 2018 के तहत पहले से मिलने वाली माफी के अतिरिक्त होगी. जो कैदी इस समय पैरोल या फरलो पर हैं, वे भी इस योजना के दायरे में आएंगे, बशर्ते उनके खिलाफ कोई जेल अपराध दर्ज न हुआ हो. पिछले एक साल में जेल नियमों का उल्लंघन करने वाले कैदियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा.

गंभीर अपराधों में दोषसिद्ध कैदी नहीं होंगे इस माफी के पात्र

हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि गंभीर अपराधों में दोषसिद्ध कैदी इस माफी के पात्र नहीं होंगे. इनमें मृत्युदंड या आजीवन कारावास वाले, एनडीपीएस, पॉक्सो, जासूसी, महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध, कोर्ट मार्शल, अवमानना और अन्य गंभीर मामलों के दोषी कैदी शामिल हैं.

दिल्ली सरकार का कहना है कि यह कदम जेलों में सुधार, कैदियों के पुनर्वास और समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में उठाया गया है. सरकार ने दोहराया कि वह एक ओर मानवीय दृष्टिकोण अपनाती है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक सुरक्षा और कानून के सख्त पालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

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