Padma Shri Award Rajasthan: राजस्थान के तीन हस्तियों को 2026 में पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। इसमें दो लोग कला क्षेत्र और एक समाज सेवा में अपना योगदान देने के लिए चुने गए हैं। इन तीनों ने जीवनभर अपनी कला और समाज सेवा के माध्यम से राज्य और देश को गौरवान्वित किया।

भरतपुर के डीग निवासी गफरुद्दीन मेवाती जोगी को कला के क्षेत्र में पद्मश्री मिलेगा। वे मेवाती लोक संगीत के प्रमुख कलाकार हैं और ‘पांडुन का कड़ा’ व भपंग वादन की परंपरा को जीवित रखने में योगदान दे रहे हैं। पिछले 60 वर्षों से वे इस लोक कला की साधना कर रहे हैं और इसे लंदन, पेरिस, कनाडा, फ्रांस समेत कई देशों में प्रस्तुत कर भारतीय लोक संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिला चुके हैं। गफरुद्दीन जोगी ढाणी शैली में महाभारत पर आधारित करीब 2500 दोहों का गायन करते हैं और अलगोजा, चिकारा, जोगी सारंगी सहित 12 पारंपरिक वाद्यों में निपुण हैं। उन्हें इससे पहले संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
जैसलमेर के तगाराम भील को भी लोक कला के क्षेत्र में पद्मश्री मिलेगा। भील समुदाय से आने वाले तगाराम राजस्थान के प्रसिद्ध अलगोजा वादक हैं और आदिवासी लोक संगीत की परंपरा को देश-विदेश में पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने मटका और बांसुरी सहित पारंपरिक वाद्यों में दक्षता हासिल की है और राजस्थान डेजर्ट फेस्टिवल, ऑल इंडिया रेडियो और नेहरू युवा केन्द्र जैसे मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत की है। तगाराम ने फ्रांस, अमेरिका, जापान, रूस और कई यूरोपीय देशों में कार्यशालाओं और प्रस्तुतियों के जरिए आदिवासी लोक कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
समाज सेवा के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित होंगे स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज, जिन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान और सेवा में लंबा योगदान दिया है।
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