झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। चाईबासा के कोल्हान और सारंडा जंगलों में चले दो दिवसीय सघन अभियान के बाद डीजीपी तदाशा मिश्रा शनिवार को खुद जवानों का हौसला बढ़ाने चाईबासा पहुंचीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस का लक्ष्य मार्च 2026 तक झारखंड को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाना है। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने इस अभियान की सफलता को ‘बेहतरीन समन्वय’ का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक क्षण है। अधिकारियों और जवानों ने जिस तरह से प्लानिंग और एग्जीक्यूशन किया, उसका परिणाम सबके सामने है।

झारखंड पुलिस के दौरान नक्सलियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सफलता से डीजीपी तदाशा मिश्रा भी उत्साहित हैं। तदाशा मिश्रा ने चाईबासा पहुंचकर अभियान में शामिल जवानों और अधिकारियों का उत्साह बढ़ाया। डीजीपी ने नक्सलियों को यह चेतावनी दी है कि वो आत्मसमर्पण करें या फिर एनकाउंटर के लिए तैयार रहें।

सीआरपीएफ के डीआईजी साकेत कुमार सिंह ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि 22 जनवरी को शुरू हुई मुठभेड़ में पहले दिन 15 और अगले दिन 2 शव बरामद किए गए। कुल 17 माओवादियों की पहचान हो चुकी है, जिनमें संगठन के शीर्ष चेहरे शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार झारखंड में अब केवल एक ही सेंट्रल कमेटी मेंबर बचा है। आंकड़ों के अनुसार चाईबासा में एनकाउंटर से पहले करीब 65 नक्सली सक्रिय थे, जिनकी संख्या अब 50 से नीचे आ गई है। पूरे राज्य (चाईबासा को छोड़कर) में अब मात्र 15 बड़े नक्सली ही शेष बचे हैं। जिसमें पलामू में 3, चतरा में 4, हजारीबाग में 2 और लातेहार-5 शामिल है। इस कार्रवाई से न केवल झारखंड, बल्कि ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्र भी अब पूरी तरह नक्सल मुक्त होने की कगार पर हैं।

अब नक्सलियों के पास हिंसा छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान के दौरान नक्सलियों के सबसे घातक हथियारों को जब्त किया है। बरामद किए गए 14 हथियारों में शामिल हैं। इसमें 4 एके 47 राइफल, 04 इंसास राइफल, 03 एसएलआर और 03 राइफल और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री शामिल है।

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