लुधियाना। राहुल गांधी द्वारा अनुशासनहीनता के मुद्दे पर बुलाई गई मीटिंग के बाद पंजाब कांग्रेस में सन्नाटा छा गया है। यहां बताना उचित होगा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद से पंजाब कांग्रेस में आपसी गुटबाजी जोरों पर है जिसके तहत पहले कैप्टन अमरेंद्र सिंह व सुनील जाखड़ सहित कांग्रेस के कई बड़े नेता एक के बाद एक करके भाजपा में शामिल हो गए।
इसके बावजूद हार का ठीकरा फोड़ने को लेकर चरणजीत चन्नी व नवजोत सिद्धू के बीच चल रहे विवाद के मद्देनजर राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस प्रधान व प्रताप बाजवा को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया लेकिन फिर भी माहौल शांत नहीं हुआ और लोकसभा चुनाव के बाद सी.एम. फेस बनने की लड़ाई शुरू हो गई। इस रेस में चरणजीत चन्नी, नवजोत सिद्धू, राजा वडिंग, प्रताप बाजवा के अलावा सुखजिंदर रंधावा, राणा गुरजीत व परगट सिंह के नाम शामिल हैं जो अक्सर एक-दूसरे के खिलाफ खुलेआम बयानबाजी करने से परहेज नहीं करते।
हालांकि पंजाब कांग्रेस के इंचार्ज भूपेश बघेल द्वारा सीएम फेस के बिना 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने का संकेत देने के बाद उक्त नेताओं द्वारा किसी को भी सीएम का चेहरा बनाने पर मदद करने की हामी भरी गई लेकिन पिछले दिनों चरणजीत चन्नी द्वारा पंजाब कांग्रेस में दलित समाज की अनदेखी का बयान देने पर जमकर हंगामा हुआ। इस मुद्दे पर शुरू हुई आपसी बयानबाजी को रोकने के लिए राहुल गांधी को खुद दखल देना पड़ा।

मिली जानकारी के मुताबिक मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में हुई मीटिंग के दौरान शामिल हुए बड़े नेताओं को अनुशासनहीनता के लिए जमकर फटकार लगाई गई है जिसकी पुष्टि मीटिंग के बाद केसी वेणुगोपाल ने यह कहकर कर दी कि किसी को भी खुलेआम बयानबाजी न करने की चेतावनी दी गई है जिसके बाद से पंजाब कांग्रेस में सन्नाटा छा गया है।
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