IDBI Bank Stake Sale: IDBI बैंक में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया अब आखिरी चरण में पहुंचती दिख रही है. सरकार ने साफ कर दिया है कि बैंक के लिए बोली जमा करने की आखिरी तारीख क्या होगी. जो भी निवेशक या कंपनी IDBI बैंक में हिस्सेदारी खरीदना चाहती है, उसे तय समय सीमा के अंदर अपनी बोली देनी होगी.
यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि इससे साफ संकेत मिलता है कि IDBI बैंक का विनिवेश अब अंतिम दौर में है. सरकार और LIC मिलकर बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं. फिलहाल दोनों की कुल हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से ज्यादा है.
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सूत्रों के मुताबिक, बोली जमा करने की डेडलाइन केंद्रीय बजट के बाद रखी गई है. इसका मकसद यह है कि निवेशकों को बजट में होने वाली नीतिगत घोषणाओं की पूरी जानकारी मिल सके. पहले यह समय सीमा दिसंबर के आखिरी हफ्ते में तय की गई थी, लेकिन बाद में इसे आगे बढ़ा दिया गया था.
आसान शब्दों में कहें तो सरकार ने अब तय कर लिया है कि IDBI बैंक के लिए बोलियां कब तक ली जाएंगी और पूरी प्रक्रिया बजट के बाद आगे बढ़ेगी.
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IDBI बैंक को खरीदने की दौड़ में कौन-कौन
IDBI बैंक को खरीदने की दौड़ में फिलहाल दो बड़े नाम सामने आए हैं. एक कनाडा की कंपनी Fairfax Financial और दूसरा भारत का Kotak Mahindra Bank. 12 दिसंबर को आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस रेस में फेयरफैक्स को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है.
बोली प्रक्रिया में सख्त नियम
बिडिंग से जुड़े दस्तावेजों में साफ लिखा है कि सभी बोलीदाताओं को बिना किसी शर्त के अपनी बोली देनी होगी. अगर किसी भी बोली में शर्तें जोड़ी गईं, तो उसे सीधे अमान्य कर दिया जाएगा. इसके अलावा, शेयर परचेज एग्रीमेंट एक बार DIPAM में जमा होने के बाद उसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा.
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सरकार के पास रहेगा वीटो का अधिकार
दस्तावेजों के अनुसार, सरकार के पास किसी भी बोली को खारिज करने का अधिकार रहेगा. हालांकि, ऐसे मामलों की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पहले ही संभावित बोलीदाताओं को इन-प्रिंसिपल मंजूरी दे चुका है. अगर फिर भी कोई बोली खारिज होती है, तो यह फैसला RBI की सलाह के बाद ही लिया जाएगा.
कैसे तय होगी रिजर्व प्राइस
सरकार रिजर्व प्राइस तय करने की प्रक्रिया भी पूरी कर चुकी है. नियमों के मुताबिक, वित्तीय बोलियां खोलने से पहले रिजर्व प्राइस फाइनल की जाएगी. हालांकि, यह कीमत पूरी तरह गोपनीय रहेगी और बोलीदाताओं को इसकी जानकारी नहीं दी जाएगी.
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एक ही बोली मिलने की आशंका
कुछ सूत्रों का कहना है कि DIPAM को सिर्फ एक ही बोली मिल सकती है. अगर ऐसा होता है, तो सही कीमत तय होने को लेकर सवाल उठ सकते हैं. हालांकि, बोली प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों ने इस आशंका को गलत बताया है.
सफल बोलीदाता को किन मंजूरियों की जरूरत होगी
जो भी बोलीदाता इस प्रक्रिया में सफल होगा, उसे अंत में RBI की ‘फिट एंड प्रॉपर’ जांच से गुजरना होगा. इसके अलावा, उसे कम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) और अन्य वैधानिक और नियामकीय संस्थाओं से जरूरी मंजूरियां भी लेनी होंगी.
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