सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय (DEO Office) में 17 जनवरी को लगी आग ने न सिर्फ लाखों महत्वपूर्ण दस्तावेजों को राख में बदल दिया, बल्कि शिक्षा विभाग की अग्निरोधी क्षमताओं पर भी सवालों की आग भड़का दी है। आग ने छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन, अनुकंपा नियुक्ति, स्थापना, मान्यता, इंस्पायर अवार्ड, विधि कक्ष, ऑडिट, वित्त एवं बजट, अनुदान, मदरसा, पेंशन, विधानसभा, पाठ्यपुस्तक, गणवेश, जावक-आवक पंजी, समग्र कक्ष, डीएमएफ और शिक्षा के अधिकार अधिनियम से जुड़ी फाइलों को राख कर दिया है। 2025 तक की लगभग सभी फाइलें जलकर खाक हो गईं, लेकिन वहीं उसी कमरे में रखी अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं बिल्कुल सुरक्षित हैं, जैसे वे किसी सुपरहीरो के कवच में लिपटी हों।

जांच समिति की रिपोर्ट तो आ चुकी है, लेकिन वह भी लगभग राख जैसी ही प्रतीत हो रही है। तीन सदस्यीय समिति संभागीय संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव, सहायक संचालक बजरंग प्रजापति और एम. जी. सतीश कुमार ने पूरी जांच की और बताया कि कार्यालय जमीनदोज हो चुका है। न कोई साक्ष्य मिला है और न ही कोई प्रत्यक्षदर्शी है। फिलहाल फोरेंसिक जांच जारी है।

जांच में यह भी सामने आया है कि आग को नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था तक नहीं थी। ऑनलाइन पोर्टल पर भी ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, इसके बावजूद शिक्षा विभाग का दावा है कि कोई भी काम नहीं रुका है। लाखों फाइलें जलकर खाक हो गईं, फिर भी काम चालू है। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या विभाग अब टेलीपैथी से काम कर रहा है या यह पुराने घपलों को दबाने का सिर्फ बहाना है?

क्या-क्या हुआ राख

  • छात्रवृत्ति और मध्यान्ह भोजन – दो अलमारी छात्रवृत्ति के दस्तावेज और तीन अलमारी मध्यान्ह भोजन के रिकॉर्ड जलकर खाक।
  • भंडार कक्ष और अनुकंपा नियुक्ति – तीन अलमारी, तीन रैक और 45 बस्ते अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज जलकर राख।
  • स्थापना शाखा – चार अलमारी, तीन रैक और 80 बस्ते महत्वपूर्ण फाइलें नष्ट।
  • मान्यता और इंस्पायर अवार्ड – मान्यता से जुड़ी चार अलमारी के दस्तावेज, छह रैक और 125 बस्ते, वहीं इंस्पायर अवार्ड की एक अलमारी जलकर खाक।
  • विधि, ऑडिट, अनुदान और मदरसा कक्ष – विधि कक्ष की दो अलमारी, ऑडिट की एक, अनुदान की दो अलमारी और मदरसा कक्ष के पूरे दस्तावेज राख।
  • वित्त एवं बजट – कंप्यूटर, फोटोकॉपी मशीन समेत सारे रिकॉर्ड खाक।
  • पेंशन, विधानसभा, पाठ्यपुस्तक और गणवेश – दो बड़ी अलमारी, एक छोटी अलमारी और सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट।
  • जावक-आवक कक्ष – 2023 से पहले की सभी पंजियां, एक-एक अलमारी और 2020 से पहले के रिकॉर्ड जलकर खाक।
  • समग्र कक्ष, DMF और RTE – एक-एक अलमारी और शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) से जुड़े 82 बस्ते पुराने दस्तावेज नष्ट।

कुल मिलाकर 2025 तक की लगभग सभी फाइलें जलकर राख हो गईं। ऑनलाइन पोर्टल पर भी ये उपलब्ध नहीं हैं।

पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष क्रिस्टोफर पॉल ने लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत में सीधे आरोप लगाया कि यह स्पष्ट है कि आग लगाई गई है। महत्वपूर्ण दस्तावेज राख हो गए, लेकिन सेवा पुस्तिकाएं बेदाग कैसे हैं? क्या यह आग लगी थी या लगाई गई थी, और शिक्षा विभाग अब क्या कहेगा कि हमारी सेवा पुस्तिकाएं अग्निरोधी हैं, जो आग से डरती नहीं हैं? उन्होंने मांग की कि मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषियों को बर्खास्त किया जाए और पुलिस जांच होनी चाहिए।

शालाएं शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने भी तंज कसते हुए कहा कि यह जांच खानापूर्ति है। सभी फाइलें जल गईं, लेकिन सेवा पुस्तिकाओं पर आंच तक नहीं आई। ऐसा लगता है कि आग को सिलेक्टिव निर्देश दिए गए थे इन्हें मत छूना, ये वीआईपी हैं। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने अभी तक रिपोर्ट पढ़ी नहीं है। लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने सवाल किया कि रिपोर्ट 20 दिन पहले आ चुकी है, दस्तावेज जल गए, लेकिन सेवा पुस्तिकाएं सुरक्षित हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि रिपोर्ट उन्हें सौंप दी गई है, लेकिन अभी इसकी जानकारी नहीं है और न ही उन्होंने इसे पढ़ा है। रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही वह बता पाएंगे कि क्या हुआ है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

वहीं स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी को कई बार कॉल किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका कोई जवाब नहीं आया।

शिक्षाविदों ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह घटना सिर्फ आग नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग की पारदर्शिता पर एक बड़ा धब्बा है। क्या सेवा पुस्तिकाओं को स्पेशल ट्रीटमेंट मिला ताकि अधिकारियों की पेंशन और प्रमोशन सुरक्षित रहें और बच्चों की छात्रवृत्ति और शिक्षा अधिकार की फाइलें राख हो जाएं? क्या यह शॉर्ट सर्किट था या किसी की सुनियोजित योजना? अगर यह सुनियोजित था, तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। मामले में फोरेंसिक जांच जारी है, लेकिन सवाल अब भी बाकी हैं।