अतीश दीपंकर/भागलपुर। स्वास्थ्य सेवाओं में कोताही और मानकों की अनदेखी को लेकर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कड़ा रुख अपनाया है। समीक्षा भवन में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की बैठक के दौरान डीएम ने सिविल सर्जन को स्पष्ट निर्देश दिया कि जिले में अवैध रूप से संचालित निजी क्लीनिकों और झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध तत्काल छापेमारी कर उन्हें सील किया जाए।

​स्कैन एंड शेयर और वाइटल्स जांच में सुधार के निर्देश

​बैठक में पाया गया कि भाव्या स्कैन एंड शेयर योजना में नाथनगर (81%) और रंगरा चौक (88%) का प्रदर्शन जिला औसत (94%) से काफी कम है। डीएम ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया। वहीं, सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल में मरीजों के वाइटल्स जांच में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई गई और सभी मरीजों की अनिवार्य जांच सुनिश्चित करने को कहा गया।

​मातृ-मृत्यु दर पर सख्ती

​सदर अस्पताल के SNCU में बेड क्षमता के विरुद्ध मात्र 75% भर्ती पर डीएम ने असंतोष जताया। उन्होंने निर्देश दिया कि नवजात शिशुओं के इलाज में कोई कमी न रहे। मातृ-मृत्यु दर की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि हर मामले की बारीकी से जांच हो कि प्रसव पूर्व उच्च जोखिम की पहचान हुई थी या नहीं। लापरवाही पाए जाने पर एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

​लापरवाही पर वेतन रोका

​प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान न कर पाने के कारण जिला सामुदायिक प्रेरक का वेतन स्थगित करने का आदेश दिया गया है। साथ ही, यक्ष्मा (टीबी) उन्मूलन के लिए ओपीडी के 3% मरीजों की अनिवार्य जांच और संदिग्ध मरीजों के एक्स-रे कराने के निर्देश दिए गए।