कुंदन कुमार/ पटना। बिहार विधानसभा में यूजीसी आरक्षण और जातिगत टिप्पणियों को लेकर सियासी पारा गरमाया हुआ है। भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने राजद और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उनके इतिहास और वर्तमान रुख पर सवाल खड़े किए हैं।

​सत्ता में रहते क्यों नहीं याद आया आरक्षण?

​विपक्ष के हंगामे पर तंज कसते हुए मिथिलेश तिवारी ने कहा कि जो लोग आज यूजीसी आरक्षण को लेकर शोर मचा रहे हैं, उन्हें तब अपनी जिम्मेदारी याद क्यों नहीं आई जब वे सत्ता के केंद्र में थे। उन्होंने लालू प्रसाद यादव के 15 साल के शासनकाल और कांग्रेस के साथ उनके गठबंधन की याद दिलाते हुए पूछा कि उस समय इन सुधारों को लागू क्यों नहीं किया गया? तिवारी के अनुसार, जब सदन में विपक्ष की भारी मौजूदगी थी, तब वे सोए हुए थे और आज जब जनता ने उनका ‘सूपड़ा साफ’ कर दिया है, तो उन्हें राजनीति चमकाने के लिए आरक्षण की याद आ रही है।

​संवैधानिक पदों और न्यायालय का हवाला

​भाजपा विधायक ने स्पष्ट किया कि जब देश के सर्वोच्च पदों (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री) पर समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व है, तो विपक्ष बेवजह का तनाव पैदा कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब सवर्ण समाज को आरक्षण व्यवस्था से कोई आपत्ति नहीं है, तो विपक्ष को परेशानी क्यों हो रही है? साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि जिस मामले पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर रहा हो, उस पर सदन में टिप्पणी करना न्यायालय की अवमानना के समान है।

​भाई वीरेंद्र के बयान पर पलटवार

​राजद विधायक भाई वीरेंद्र द्वारा सवर्णों के खिलाफ दी गई विवादित टिप्पणी पर मिथिलेश तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भाई वीरेंद्र की बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि वे अमर्यादित बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि सवर्ण समाज इतना कमजोर नहीं है कि कोई उन्हें खदेड़ दे। उन्होंने राजद विधायक को अपनी सीमाओं में रहने की नसीहत देते हुए कहा कि बिहार में किसी व्यक्ति विशेष का राज नहीं चलता।