नालंदा। बिहार कांग्रेस में जमीनी बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। शहर के धनेश्वर घाट स्थित राजेंद्र आश्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पर्यवेक्षक रणविजय सिंह लोचव ने ‘संगठन सृजन अभियान’ का शंखनाद किया। जिलाध्यक्ष नरेश प्रसाद अकेला की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का संदेश साफ था- अब पार्टी का ढांचा कमरों में बैठकर नहीं, बल्कि गांव की पगडंडियों पर तय होगा।

​एसी कमरों से बाहर निकलेगा संगठन

​पर्यवेक्षक रणविजय सिंह ने पार्टी आलाकमान की नई नीति का खुलासा करते हुए कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की स्पष्ट मंशा है कि संगठन का निर्माण जमीनी फीडबैक पर आधारित हो। उन्होंने साफ किया कि जिलाध्यक्षों का चयन अब दिल्ली या पटना के रसूख से नहीं, बल्कि स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय से होगा। इसके लिए पर्यवेक्षकों की टीम हर विधानसभा और ब्लॉक में जाकर पुराने कार्यकर्ताओं, युवाओं और वरिष्ठ नेताओं से सीधा संवाद करेगी।

​आवेदन से चयन और पुराने दिग्गजों की वापसी

​संगठन में जिम्मेदारी के इच्छुक कार्यकर्ताओं के लिए एक आवेदन फॉर्म जारी किया गया है, जिसे पांच-छह दिनों में जमा करना होगा। पर्यवेक्षक अगले सात दिनों तक ब्लॉक स्तर पर जमीनी हकीकत परखेंगे और अपनी रिपोर्ट सीधे आलाकमान को सौंपेंगे। साथ ही, 17 तारीख को एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य हाशिए पर चले गए पुराने और असंतुष्ट नेताओं को फिर से मुख्यधारा में लाना है।

​टिकट वितरण में बढ़ेगा जिलाध्यक्ष का कद

​पार्टी अब जिलाध्यक्ष को पावर सेंटर बनाने की तैयारी में है। भविष्य में बिना जिलाध्यक्ष की सिफारिश के विधानसभा या लोकसभा टिकट मिलना नामुमकिन होगा। उन्हें मंडल और ग्राम समितियों के गठन के लिए पूर्ण स्वतंत्रता दी जाएगी। इस अभियान में रणविजय सिंह के साथ प्रदेश स्तर के पांच अन्य पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं, जो संगठन की इस नई ऊर्जा को धरातल पर उतारने में मदद करेंगे।