प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे वयस्क जोड़ों की सुरक्षा को लेकर अहम और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति विवेक सिंह की एकल पीठ ने स्पष्ट कहा कि राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह हर नागरिक के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करे।
भेदभाव स्वीकार्य नहीं
न्यायमूर्ति विवेक सिंह की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि केवल अलग-अलग धर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि में रहने की वजह से किसी भी वयस्क जोड़े को संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। जाति, धर्म, पंथ या लिंग के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।
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बता दें कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप के एक और मामले को लेकर कहा था कि लिव-इन रिलेशनशिप की अवधारणा भारतीय मध्यवर्गीय समाज में स्थापित कानून के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने शादी का वादा कर महिला का यौन शोषण करने के आरोपी की जमानत याचिका को सशर्त मंजूर करते हुए अपने आदेश में ये टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए ये भी कहा कि लिव-इन-रिलेशनशिप की अवधारणा महिलाओं के हितों के विरुद्ध है।
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