प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के इजराइल के आधिकारिक दौरे पर हैं. जहां वे कई अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं. उन्होंने इजरायल की संसद को भी संबोधित किया. इजराइल आकार में बहुत छोटा देश है. आबादी बहुत कम है लेकिन यह छोटा देश इनोवेशन में बहुत आगे है. दुनिया को रोशनी दे रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजराइल दौरा भी इसे पुख्ता करता है. भारत और इजराइल की साझेदारी अलग-अलग क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ रही है. आयरन डोम बनाकर दुनिया को ताकत दिखाई. खारे पानी को मीठे पानी में बदलने का तरीका खोजा.

पीएम मोदी इजराइल के दौरे पर हैं. वो इजराइल जो इनोवेशन के लिए जाना जाता है. ड्रिप इरिगेशन तकनीक खोजी जो कम पानी में खेती करने में मदद करती है.

आयरन डोम रक्षा प्रणाली है. यह रॉकेट और मिसाइल रोकती है. कम दूरी की मिसाइलों को लक्ष्य बनाती है. रेडार से रॉकेट को ट्रैक करती है. कंप्यूटर तुरंत अनुमान लगाते हैं. कहां गिरेगा, कितना नुकसान होगा. जो रॉकेट आबादी वाले क्षेत्र की ओर हों. उन्हीं को निशाना बनाकर मार गिराया जाता है.

इज़राइल एक रेगिस्तानी देश है. पानी बहुत कम है. इसी कमी से समाधान निकला. ड्रिप इरिगेशन की तकनीक विकसित हुई. ड्रिप इरिगेशन में खेतों में पाइप लगते हैं. पाइप पर छोटे-छोटे ड्रिपर होते हैं. पानी पौधों की जड़ों तक सीधे पहुंचता है. इससे बहुत कम पानी से काम हो जाता है. वाष्पीकरण कम होता है. बर्बादी भी रुकती है. इस मामले में इज़राइल की कंपनी नेटाफिम मशहूर है.

दुनिया भर में उसका सिस्टम चलता है. मोदी के इज़राइल दौरे में कृषि सहयोग मुख्य विषय रहा. सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए इज़राइली मॉडल प्रेरणा बना हुआ है.

ड्रिप के साथ स्प्रिंकलर तकनीक भी आई. कम पानी में ज्यादा खेत सिंचित हुए. सेंसर लगाए गए. मिट्टी में नमी नापी गई. कब कितना पानी देना है. कंप्यूटर और मोबाइल से तय हुआ. इसे प्रेसिशन एग्रीकल्चर कहा गया. बीज से कटाई तक आंकड़े जुटाए गए. फसल, मिट्टी, मौसम सबका डेटा बना.

इज़राइल समुद्र के किनारे है. लेकिन पीने का पानी कम है. इसीलिए डीसैलीनेशन प्लांट लगाए गए. समुद्र के पानी से मीठा पानी निकाला गया. इसके लिए रिवर्स ऑस्मोसिस तकनीक विकसित हुई. ऊर्जा की खपत घटाई गई. बड़े-बड़े संयंत्र लगे. अब इज़राइल की ज़रूरत का पानी का बड़ा हिस्सा इन्हीं प्लांटों से आता है.

इज़राइल पानी को संसाधन मानता है. एक-एक बूंद का हिसाब रखता है. दुनिया में सबसे ज्यादा वेस्ट वाटर रीसायक्लिंग इज़राइल ही करता है. लीकेज कंट्रोल के लिए सेंसर लगे हैं.

इज़राइल को स्टार्ट-अप नेशन कहा जाता है. यहां प्रति व्यक्ति स्टार्टअप बहुत ज्यादा हैं. खासकर साइबर सिक्योरिटी में. ऑनलाइन हमलों से सुरक्षा के लिए नए सॉफ्टवेयर और टूल बनाए गए. क्लाउड सिक्योरिटी, नेटवर्क सिक्योरिटी, डेटा प्रोटेक्शन, सबमें इज़राइली कंपनियां आगे हैं.

इज़राइल ने कई मेडिकल डिवाइस बनाए. छोटे पर असरदार उपकरण विकसित हुए. टेली-मेडिसिन प्लेटफॉर्म बने. दूर-दराज के मरीजों तक डॉक्टर पहुंचे. रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार हुए. इमेजिंग, डायग्नोस्टिक और सर्जिकल उपकरण का उपयोग कई देश कर रहे हैं.

भारत और इज़राइल अगर साथ चलें तो खेती, पानी, सुरक्षा, टेक्नोलॉजी में दुनिया के लिए नए उदाहरण बना सकते हैं. मोदी का इज़राइल दौरा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m