Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में हुई एक अनोखी शादी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। यादव समाज से जुड़े एक शिक्षित जोड़े ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से अलग हटकर संविधान को साक्षी मानते हुए विवाह किया। इस शादी में न पंडित बुलाया गया, न मंत्रोच्चार हुआ और न ही दहेज या फिजूलखर्ची की कोई व्यवस्था की गई।

दूल्हा अनंत यादव आईआईटी से पढ़े हुए हैं और वर्तमान में अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी (एसडीएम स्तर के अधिकारी) के पद पर कार्यरत हैं। वहीं दुल्हन भी उनके ही बैच की अधिकारी हैं और प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी के रूप में सेवा दे रही हैं। दोनों ओबीसी वर्ग के यादव समाज से आते हैं।

इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि वर-वधू ने पारंपरिक सात फेरे या सात वचन लेने के बजाय भारतीय संविधान की शपथ लेकर एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया। शादी का उद्देश्य पाखंड-मुक्त और समानता आधारित वैवाहिक परंपरा का संदेश देना बताया जा रहा है।

कार्यक्रम बेहद सादगीपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में दोनों ने बराबरी, सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की शपथ ली। इस अनोखे विवाह की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

हालांकि लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ लोग इसे सामाजिक बदलाव की दिशा में सकारात्मक पहल बता रहे हैं, तो कुछ पारंपरिक रीति-रिवाजों से अलग होने पर सवाल भी उठा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इस तरह का विवाह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी पटना में एक यूट्यूबर ने संविधान को साक्षी मानकर शादी की थी, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। देश के अन्य राज्यों में भी समय-समय पर इस तरह की वैकल्पिक शादियां देखने को मिल चुकी हैं। इस अनोखी शादी ने एक बार फिर परंपरा और आधुनिक सोच के बीच चल रही बहस को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

ये भी पढ़ें- मोतीहारी में शादी के 2 दिन बाद आशिक संग फरार हुई दुल्हन, परीक्षा का बहाना बनाकर गहना और कैश भी साथ ले गई