Ali Khamenei Journey: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ali Khamenei Death) की मौत हो गई है। मेरिकी-इजराइली एयर स्ट्राइक में अली खामेनेई की मौत हो गई। हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू भी मारे गए हैं। ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी खामेनेई की मौत की पुष्टि करते हुए कहा, “खामेनेई US इंटेलिजेंस से नहीं बच पाए।

खामेनेई की मौत ईरान के लिए एक अपूरणीय क्षति है। साथ ही करोड़ों शिया मुसलमानों के लिए झटका भी। अली खामेनेई शिया मुस्लिमों के सबसे बड़े धार्मिक नेता थे। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई 37 साल से ज्यादा समय तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे और अपनी आखिरी सांस तक अमेरिका और इजराइल से लड़ते रहे।

अली खामेनेई ने 1989 में अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी की मौत के बाद इस्लामिक रिपब्लिक की कमान संभाली थी। अयातुल्ला खोमैनी एक करिश्माई नेता थे, जिन्होंने एक दशक पहले इस्लामिक क्रांति को लीड किया था। खोमैनी उस क्रांति के पीछे की आइडियोलॉजिकल ताकत थे जिसने पहलवी राजशाही का राज खत्म किया, लेकिन खामेनेई ने ही मिलिट्री और पैरामिलिट्री सिस्टम को बनाया जो ईरान को उसके दुश्मनों से बचाता है और उसे उसकी सीमाओं के बाहर भी उसकी सुरक्षा करता है। अली खामेनेई आज ईरान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के शिया मुसलमानों के नेता माने जाते थे। वहीं हाल ही में फिलिस्तीन को लेकर उनके स्टांस के बाद सुन्नी मुसलमानों में भी उनकी लोकप्रियता खासा बढ़ गई थी।

मशहद से तेहरान के तख्त तक

अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के मशहद में हुआ था। यह खोरासान प्रांत का एक बड़ा शिया मान्यताओं वाला शहर है, जहां इमाम रज़ा की दरगाह है. खामेनेई का जन्म अज़री नस्ल के एक धार्मिक मौलवी परिवार में हुआ था, उनके पिता, जावेद खामेनेई, एक आलिम (स्कॉलर) और मुजतहिद थे जो असल में नजफ़ इराक के रहने वाले थे। उन्होंने शुरुआती कुरानी शिक्षा से मशहद से ली और फिर क़ोम में एडवांस्ड इस्लामिक स्टडीज कीं, जहां उन्होंने अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी जैसे खास लोगों से पढ़ाई की। जिनके क्रांतिकारी विचारों ने उन पर बहुत असर डाला। 1960 के दशक से शाह के खिलाफ प्रदर्शनों में एक्टिव खामेनेई को कई बार जेल जाना पड़ा।

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद कई अहम भूमिकाएं निभाईं

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद उन्होंने अहम भूमिकाएं निभाईं। वह रिवोल्यूशनरी काउंसिल के सदस्य, डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर, कुछ समय के लिए IRGC कमांडर और ईरान होस्टेज क्राइसिस बातचीत में अहम व्यक्ति रहे। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान ईरान के तीसरे प्रेसिडेंट (19811989) के तौर पर काम किया। 1989 में खोमैनी की मौत के बाद एक्सपर्ट्स की असेंबली ने खामेनेई को सुप्रीम लीडर नियुक्त किया और वह 36 सालों से ज़्यादा समय तक इस पद पर रहे।

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