देहरादून. यूपीसीएल ने नई बिजली की दरें लागू की है, जिसे लेकर नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने धामी सरकार पर करारा हमला बोला है. यशपाल आर्य ने कहा, उत्तराखण्ड के संसाधनों पर बाहरी कब्जा क्यों? जब स्थानीय स्तर पर हमारे अपने लोग, हमारे युवा और हमारे उद्यमी मात्र 2 रुपये प्रति यूनिट की लागत पर बिजली उत्पादन कर सकते हैं, तो आखिर क्यों सरकार 7–8 रुपये प्रति यूनिट की दर से उत्पादन या खरीद कर प्रदेश की जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है? यह केवल आर्थिक विसंगति नहीं, बल्कि नीति और नीयत दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है.

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आगे यशपाल आर्य ने कहा, सरकारी भूमि, जो उत्तराखण्ड की जनता की संपत्ति है, उसे बाहरी कंपनियों को कौड़ियों के दाम पर लीज पर देना, और फिर उन्हें विशेष रियायतें देना, आखिर किस हित में है? क्या उत्तराखण्ड के युवाओं, स्थानीय उद्योगों और पहाड़ की अर्थव्यवस्था से ज्यादा महत्वपूर्ण बाहरी कंपनियों के मुनाफे हैं?

प्रदेश की जनता जानना चाहती है, जब संसाधन हमारे हैं, तो लाभ बाहर क्यों जा रहा है? जब उत्पादन हम सस्ता कर सकते हैं, तो महंगा मॉडल क्यों थोपा जा रहा है? स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहरी कंपनियों को बढ़ावा क्यों? हम स्पष्ट मांग करते हैं कि सरकार कम से कम 80% दर पर स्थानीय उत्पादकों से बिजली खरीदने की नीति लागू करे. इससे
प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा. स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. पलायन रुकेगा और उत्तराखण्ड वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनेगा.

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यदि सरकार प्रदेशहित की अनदेखी करती रही, तो यह जनता की सहनशीलता की परीक्षा होगी. याद रहे लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है. उत्तराखण्ड की जनता जागरुक है, स्वाभिमानी है और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से अपना निर्णय देना भी जानती है. अब सवाल सिर्फ बिजली का नहीं है, यह उत्तराखण्ड के स्वाभिमान का सवाल.