हरियाणा में दमकल कर्मचारियों की राज्यव्यापी हड़ताल 28वें दिन में प्रवेश कर गई है, जिसे अब 10 मई तक बढ़ा दिया गया है। कर्मचारी वेतन वृद्धि और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग पर अड़े हैं।
परवेज खान, यमुनानगर। हरियाणा में दमकल विभाग के कर्मचारियों की अपनी मांगों को लेकर जारी राज्यव्यापी हड़ताल आज 28वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। सरकार द्वारा मांगों पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अब अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल को 10 मई तक बढ़ाने का बड़ा निर्णय लिया है। इस फैसले से प्रदेश की अग्निशमन सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है, जिससे प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। हरियाणा दमकल विभाग यूनियन के महासचिव गुलशन भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी जायज मांगों को स्वीकार नहीं करती, यह आंदोलन थमेगा नहीं।

कर्मचारियों की अनदेखी और कोर्ट आदेशों के उल्लंघन का आरोप
यूनियन के महासचिव गुलशन भारद्वाज ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दमकल विभाग में कार्यरत कच्चे कर्मचारियों के 10 साल की सेवा पूरी होने के बावजूद उन्हें नियमित करने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। भारद्वाज के अनुसार, इस विषय में माननीय न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों को भी सरकार और विभाग द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया कि पे-रोल पर काम कर रहे कर्मचारियों के वेतन में लंबे समय से एक बार भी बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है।
जोखिम भरा कार्य और मुआवजे की मांग
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने कालका में हुई हालिया अग्निकांड की घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले दमकल कर्मचारियों को ‘शहीद’ का दर्जा दिया जाए और उनके शोक संतप्त परिजनों को एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि (मुआवजा) प्रदान की जाए। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी जान हथेली पर रखकर जनता की सेवा करते हैं, लेकिन सरकार उनके हितों और सुरक्षा के प्रति पूरी तरह उदासीन बनी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार 10 मई से पहले यूनियन के साथ संवाद स्थापित कर इस गतिरोध को समाप्त करती है या आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
यूनियन ने साफ कर दिया है कि उनकी लड़ाई केवल वेतन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके सम्मान और सुरक्षा से जुड़ी है। कच्चे कर्मचारियों का नियमितीकरण, पे-रोल कर्मियों के वेतन में सम्मानजनक वृद्धि, और जोखिम भरे कार्य के बदले उचित बीमा व शहीद का दर्जा उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। दमकल विभाग के इस कड़े रुख ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी है, क्योंकि भीषण गर्मी के इस मौसम में आगजनी की घटनाएं बढ़ने का खतरा रहता है और हड़ताल की लंबी अवधि सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

