वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग ने बिलासपुर में कार्यरत दिव्यांग महिला कर्मचारी का 546 किलोमीटर दूर तबादला कर दिया। इस आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। बता दें कि याचिकाकर्ता वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग बिलासपुर में पदस्थ है। याचिका में बिलासपुर या किसी अन्य उपयुक्त निकटवर्ती स्थान पर समायोजित करने की मांग की गई है। याचिका की सुनवाई जस्टिस एन के व्यास की सिंगल बेंच में हुई।

दरअसल, राज्य शासन ने 30 मई 2026 को विभाग में पर्यवेक्षक पूर्णिमा उपाध्याय का स्थानांतरण किया है। आदेश को चुनौती देते हुए याचिका में कहा गया है कि बिलासपुर कार्यालय से एकीकृत बाल विकास परियोजना, बीजापुर में उनको स्थानांतरित कर दिया गया है। जबकि वे 42 प्रतिशत स्थायी विकलांग हैं और मेडिकल बोर्ड ने इसे प्रमाणित किया है। याचिकाकर्ता की ओर से मेडिकल बोर्ड व राज्य शासन के स्थानांतरण नीति का हवाला देते हुए बताया गया है कि उन्होंने सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी विकलांगता प्रमाण पत्र भी रिकॉर्ड पर रखा है।

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सामान्य प्रशासन द्वारा 30 अगस्त 2010 को जारी परिपत्र के अनुसार विभाग में शारीरिक रूप से अक्षम कर्मचारियों को आमतौर पर उनके गृह जिले या पास के किसी स्टेशन पर तैनात किया जाता है, ताकि उनकी विकलांगता से उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सके। राज्य सरकार के तय मापदंड व स्पष्ट नीति के बावजूद याचिकाकर्ता का तबादला बीजापुर जिले में कर दिया गया है, जो उनके वर्तमान पोस्टिंग स्थान से लगभग 546 किलोमीटर दूर है, जिससे उन्हें गंभीर असुविधा और कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

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