पटना। मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी ने बिहार राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। बिहार से इस बार राज्यसभा की पांच सीटें रिक्त हो रही हैं। इनमें से दो सीटों पर सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड अपने प्रत्याशी उतारेगी, ऐसे में बीजेपी के हिस्से में सीमित सीटें आई हैं। इसी आधार पर जारी पहली सूची में बिहार से नितिन नवीन और शिवेश राम के नामों की घोषणा की गई है। हालांकि चर्चाओं के केंद्र में रहे भोजपुरी पावर स्टार और बीजेपी नेता पवन सिंह को इस सूची में स्थान नहीं मिला है, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
पार्टी नेतृत्व से मुलाकात भी की थी
पिछले कुछ समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि पार्टी पवन सिंह को राज्यसभा भेज सकती है। 26 फरवरी को उन्होंने दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात भी की थी, जिसे उन्होंने शिष्टाचार भेंट बताया था। राज्यसभा को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि जो निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा, वही स्वीकार होगा। उनके इस बयान को उनकी संभावित दावेदारी के संकेत के रूप में देखा गया था।
कई सीटों पर अभी घोषणा बाकी है
हालांकि राज्यसभा की कुल 37 सीटों पर चुनाव होना है और पहली सूची में सभी उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए गए हैं। कई सीटों पर अभी घोषणा बाकी है। ऐसे में सैद्धांतिक रूप से संभावना बनी हुई है कि पार्टी उन्हें किसी अन्य राज्य से भी भेज सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहली सूची से नाम बाहर होना अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि कई बार रणनीतिक कारणों से नाम बाद में घोषित किए जाते हैं।
पश्चिम बंगाल से टिकट दिया था
पवन सिंह को 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल से टिकट दिया था, लेकिन एक पुराने गीत को लेकर विवाद बढ़ने पर उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। बाद में उन्होंने बिहार की काराकाट सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा, जहां उपेंद्र कुशवाहा भी मैदान में थे। त्रिकोणीय मुकाबले में दोनों को हार का सामना करना पड़ा और वोटों के बंटवारे का लाभ तीसरे उम्मीदवार को मिला।
पवन सिंह के रिश्तों में दूरी दिखी
लोकसभा चुनाव के बाद कुछ समय तक पार्टी और पवन सिंह के रिश्तों में दूरी दिखी, लेकिन 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने सक्रिय प्रचार कर हालात सामान्य होने के संकेत दिए। अब पहली सूची से बाहर होने के बाद यह देखना अहम होगा कि क्या उन्हें संगठन में कोई नई जिम्मेदारी मिलती है या अगली सूची में उनका नाम सामने आता है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनकी राजनीतिक यात्रा फिलहाल एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है और आगे की रणनीति ही उनके भविष्य की दिशा तय करेगी।
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