झारखंड के दुमका जिले के कुम्हड़ाबाद की निवासी सुदीपा दत्ता ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 41वीं रैंक हासिल कर IAS बन गईं हैं। उन्होंने अपनी अधिकांश तैयारी घर पर रहकर ही की, जिससे उन्होंने यह प्रतिष्ठित सफलता अर्जित की। सुदीपा के पिता सच्चिदानंद दत्ता दुमका पोस्ट ऑफिस में असिस्टेंट पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत रहे हैं। वे वर्ष 1996 से 2016 तक बांका में पदस्थापित थे और 2017 में दुमका आए। उनकी माता पम्पा दत्ता ने मैट्रिक तक पढ़ाई की है और उन्होंने सुदीपा को हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।

कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य साफ हो, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती. झारखंड की उपराजधानी दुमका की बेटी सुदीपा दत्ता ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 41वां रैंक हासिल कर इस बात को सच कर दिखाया है.

सुदीपा ने अपने तीसरे प्रयास में यह सफलता घर पर रहकर सेल्फ स्टडी और स्थानीय लाइब्रेरी की मदद से प्राप्त की. उनकी यह उपलब्धि सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखने वाले युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है. एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुदीपा ने बिना किसी नामी कोचिंग संस्थान की मदद के, घर पर रहकर ही देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है.

उन्होंने अपनी असफलताओं से सीख लेकर खुद को तराशा. पहले प्रयास में उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी. दूसरे प्रयास में प्रीलिम्स और मेंस पास किया, इंटरव्यू तक पहुंचीं लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका. फिर तीसरे प्रयास में अपनी कमियों को दूर किया और सीधे 41वां रैंक हासिल कर न केवल चयन सुनिश्चित किया, बल्कि पूरे राज्य का नाम रोशन कर दिया.

आज के दौर में जहां छात्र लाखों रुपये खर्च कर दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में कोचिंग लेते हैं, वहीं सुदीपा ने दुमका में अपने घर को ही पाठशाला बनाया. उनके पिता सच्चिदानंद दत्ता पोस्ट ऑफिस में पोस्ट मास्टर हैं और माता पम्पा दत्ता एक कुशल गृहिणी हैं.

सुदीपा की शुरुआती शिक्षा बांका के संत जोसेफ स्कूल (10वीं) और दुमका के सिदो-कान्हू हाई स्कूल (12वीं) से हुई. इसके बाद उन्होंने दुमका के ही आदित्य नारायण महाविद्यालय से स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री ली. कोचिंग के बजाय उन्होंने राजकीय पुस्तकालय में घंटों समय बिताया, ग्रुप डिस्कशन में हिस्सा लिया और मॉक टेस्ट के जरिए अपनी तैयारी को धार दी.

सुदीपा की शैक्षणिक योग्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने हाल ही में जेपीएससी (JPSC) द्वारा आयोजित सीडीपीओ (CDPO) परीक्षा में भी सफलता हासिल की थी. उनकी यह उपलब्धि उन लाखों छात्रों के लिए एक मिसाल है जो आर्थिक तंगी के कारण बड़े शहरों का रुख नहीं कर पाते.

सफलता का यह सफर आसान नहीं था। वर्ष 2022 में वह UPSC प्रीलिम्स परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाईं। उन्होंने हार नहीं मानी और वर्ष 2023 में फिर से परीक्षा दी, जिसमें वे इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन मात्र 9 अंकों से अंतिम चयन से चूक गईं। आखिरकार, जनवरी 2026 में सुदीपा दत्ता ने UPSC में 41वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का अपना सपना साकार किया।

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