गोविंद पटेल, कुशीनगर। विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्मारक रामाभार स्तूप के प्रतिबंधित क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रीय महत्व के इस संरक्षित स्मारक के पास नियमों की अनदेखी कर निर्माण कार्य किए जाने पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने नगर पालिका परिषद कुशीनगर को नोटिस जारी कर तत्काल निर्माण कार्य रुकवाने के निर्देश दिए हैं।

प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर निर्माण कार्य

बताया जा रहा है कि रामाभार स्तूप के पश्चिम दिशा में करीब 43.4 मीटर की दूरी पर प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जबकि नियमों के मुताबिक किसी भी संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित होता है और इसके बाद 200 मीटर तक का क्षेत्र विनियमित क्षेत्र माना जाता है। एएसआई द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने से सवाल खड़े हो गए हैं।

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जांच रिपोर्ट में सच्चाई छिपाई जा रही

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मामले में तहसील प्रशासन की जांच रिपोर्ट में भी सच्चाई छिपाई जा रही है और उच्च अधिकारियों को यह बताया जा रहा है कि मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा है। हालांकि जब मौके पर पड़ताल की गई तो वास्तविकता कुछ और ही सामने आई। ग्राउंड रिपोर्टिंग में प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण कार्य होते हुए देखा गया, जिससे यह साफ है कि पुरातत्व कानूनों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण कार्य नहीं रोका गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब बड़ा सवाल यह है कि नोटिस के बावजूद चल रहे इस निर्माण पर जिम्मेदार अधिकारी कब कार्रवाई करेंगे और विश्व धरोहर महत्व वाले इस बौद्ध स्थल के आसपास हो रहे अवैध निर्माण पर आखिर कब तक रोक लग पाएगी।