कुमार इंदर, जबलपुर। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर जबलपुर में कैंडल जुलूस निकाला गया। शिया समुदाय ने जुलूस निकालकर ईरान पर हमले का विरोध जताया। कैंडल जुलुस में सैंकड़ों शिया मुस्लिम महिलाएं और बच्चे भी मौजूद रहे। इस दौरान खामेनेई साहब जिंदाबाद के नारे लगाए गए। वहीं “ईरान से ये सदा आई, शिया सुन्नी भाई-भाई” के जगह-जगह बैनर लगाए गए। शिया समुदाय से जुड़े लोगों ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को मज़लूमों पर जुल्म बताया। इजराइल और अमेरिका को जालिम देश बताया।
शिया समुदाय ने जुल्म के खिलाफ हमेशा आवाज उठाने का ऐलान किया। रैली में शामिल मुस्लिम समाज के पदाधिकारियों ने भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग भी की है। भारत सरकार से युद्ध रुकवाने के लिए पहल करने और जरूरतमंदों को दवाइयां और अन्य जरूरी सामान मुहैया कराने की मांग की है।
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भारत सरकार से की ये मांग
मौलाना सैय्यद उरूज अली ने कहा कि ये विरोध जुल्म और अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे है। जो इजराइल और अमेरिका तरफ से ईरान पर हो रहा है। हम जमाने को ये भी बताना चाहते है कि आप अच्छे इंसान को मार सकते है, लेकिन उसकी याददाश्त और नेकी (अच्छाई) को नहीं मारा जा सकता है। वहीं उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से भारत सरकार से मांग है कि युद्ध को रोकने और जुल्म को खत्म करने का प्रयास करें।
इजराइल को बताया इंटरनेशनल मुजरिम
वहीं इरफान उल हक ने कहा कि आज हम उस शख्सियत के गम में ये कैंडल मार्च कर रहे है, जिसे इजराइल और अमेरिका ने बमबारी से शहीद कर दिया। अयातुल्ला खामेनेई गाजा के मजलूमों के साथ खड़े रहे। इसलिए ये इजराइल जो इंटरनेशनल मुजरिम है, वांटेड है, इंसानियत का दुश्मन आज ईरान पर हमला कर रहा है। भारत सरकार से इस बात की उम्मीद करते है कि गुट निरपेक्ष राष्ट्र की हैसियत से रोल निभाए, लेकिन जिस तरीके से हमारे प्रधानमंत्री ने एक देश के कहने पर आज जिस तरह का रवैया अपनाया है, वो एक अरब 20 करोड़ भारतवासियों के लिए बड़े ही अफसोस की बात है।
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आपको बता दें कि यह जुलूस जबलपुर के फूटाताल इलाके में स्थित मस्जिद जाकिर अली से शुरू हुआ। जो क्षेत्र के कई मार्गों का भ्रमण करते हुए गलगला के इमामबाड़े में समापन हुआ। यह विशाल कैंडल जुलूस अंजुमन निदा-ए-इस्लाम के बैनर तले निकाला गया था।
गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरानी के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की जान चली गई थी। खामेनेई की मौत पर ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों का ऐलान किया गया। वहीं अयातुल्ला खामेनेई की मौत के 10 दिनों के अंदर ईरान ने मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना हैं।
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