शब्बीर अहमद, भोपाल। राजधानी भोपाल के शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र में 5 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और निर्मम हत्या के जघन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। दोषी अतुल निहाले को दी गई तिहरी फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। अब सुप्रीम कोर्ट खुद मामले में सजा और दोष सिद्धि से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगा।
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सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी आजरिया ने यह आदेश दिया है। कोर्ट अब निचली अदालत और हाईकोर्ट के फैसलों में हस्तक्षेप की आवश्यकता है या नहीं, यह रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर तय करेगा।
यह है पूरा घटनाक्रम
- घटना: 24 सितंबर 2024 को शाहजहांनाबाद इलाके में आरोपी अतुल निहाले ने 5 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को पानी की टंकी में डाल दिया गया था।
- भोपाल की विशेष POXO कोर्ट ने 18 मार्च 2025 को आरोपी को अलग-अलग धाराओं (दुष्कर्म, हत्या, POCSO एक्ट आदि) के तहत तिहरी फांसी की सजा सुनाई थी।
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनवरी 2026 में फांसी की सजा को बरकरार रखा और कहा था कि “इसकी कल्पना ही रूह कंपा देने वाली है”। कोर्ट ने इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” केस माना था।
सुप्रीम कोर्ट की इस रोक से फांसी की सजा का क्रियान्वयन फिलहाल रुक गया है। आरोपी की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के दौरान यह आदेश आया है। बता दें कि यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय रहा है और बच्चियों की सुरक्षा तथा ऐसे जघन्य अपराधों पर कड़ी सजा की मांग तेज हुई थी। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद अंतिम फैसला आएगा।
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