बांग्लादेश में बीएनपी नेता तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद भारत के साथ सुरक्षा संबंधों में तेजी से सुधार के संकेत मिलने लगे हैं. पड़ोसी मुल्क में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली कार्यवाहक सरकार के वक्त ये रिश्ते अपने निम्न स्तर पर पहुंच गए थे. यूनुस खुलेआम पाकिस्तान और चीन की परस्ती में जुटे थे. वह भारत विरोधी ताकतों को लगातार बढ़ावा दे रहे थे. उनके कार्यकाल में बांग्लादेश कट्टरपंथ की ओर तेजी से बढ़ रहा था. वहां अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ लगातार हिंसा हो रही थी. लेकिन, अब ऐसा लगता है कि वहां कि निर्वाचित सरकार सच्चाई को समझ गई है. भारत की गोद में बैठे इस मुल्क को पता चल गया है कि पड़ोसी से दुश्मनी कर वह कभी सुरक्षित और समृद्ध नहीं बन सकता.

दरअसल, हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश की मिलिट्री इंटेलिजेंस के प्रमुख मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी ने फरवरी के आखिरी हफ्ते में सीक्रेट तरीके से नई दिल्ली का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, रॉ चीफ पराग जैन और मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल आरएस रमन से महत्वपूर्ण बैठकें कीं. यह यात्रा अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के बेदखल होने के बाद दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय सुरक्षा स्तर पर पहली बड़ी कूटनीतिक कदम मानी जा रही है.

बांग्लादेश की आर्मी में बड़ा बदलाव

मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को 22 फरवरी को प्रोमोट कर डायरेक्टर जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस (DGFA) का प्रमुख बनाया गया था. यह बांग्लादेश की आर्मी में तारिक रहमान सरकार द्वारा किए गए बदलाव का हिस्सा था. इस नियुक्ति के महज एक हफ्ते बाद वे रायसीना डायलॉग के मौके पर दिल्ली पहुंचे. इस दौरान उन्होंने डोभाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से द्विपक्षीय बैठकें कीं. रॉ चीफ पराग जैन ने उन्हें डिनर दिया. भारतीय पक्ष से इन बैठकों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया. बांग्लादेश ने इस उनकी इस यात्रा को सीक्रेट रखने की कोशिश की.

वहां के मीडिया में चौधरी की यात्रा को मेडिकल टूर बताया गया. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इन मीटिंग में दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि किसी भी देश की जमीन का इस्तेमाल दूसरे के खिलाफ दुश्मनी फैलाने वाले तत्वों द्वारा नहीं किया जाएगा. यह एक बहुत बड़ी बात है. भारत की हमेशा से यही चिंता रही है. यूनुस के वक्त बांग्लादेश कट्टरपंथी और पाकिस्तानी आतंकवादियों के ठिकाने के रूप में उभरने लगा था. उसकी कोशिश भारत के खिलाफ एक नया मोर्चा खोलने की थी.

पाकिस्तान की नहीं गली दाल

लेकिन, तारिक रहमान की बीएनपी सरकार के आने के बाद ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की दाल नहीं गल रही है. रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में वापस लौटे थे. उन्होंने फरवरी के चुनाव में शानदार जीत हासिल की और 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. उनकी सरकार ने भारत के साथ संबंध सुधार को प्राथमिकता दी है.

बांग्लादेश ने इस यात्रा को पूरी तरह गुप्त रखा. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चौधरी मेडिकल कारणों से दिल्ली गए थे. लेकिन इस बीच बांग्लादेशी मीडिया में सोमवार को पश्चिम बंगाल में दो बांग्लादेशी नागरिकों- फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन की गिरफ्तारी की खबर आई. ये दोनों रेडिकल स्टूडेंट लीडर शरीफ उस्मान हादी की हत्या में आरोपी हैं. हादी की मौत 18 दिसंबर को सिंगापुर के अस्पताल में हुई थी. बांग्लादेशी मीडिया ने इसे चौधरी की दिल्ली यात्रा का नतीजा बताया. इसको दोनों देशों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग में सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

ऐसे में अगर चीजें ऐसे ही आगे बढ़ती है तो निश्चित तौर पर यह पाकिस्तान के लिए झटका साबित होगा. पाकिस्तान मोहम्मद यूनुस के लिए बांग्लादेश को भारत के खिलाफ एक मोर्चा के तौर देख रहा था. लेकिन, रहमान की नई सरकार ने सूझबूझ का परिचय देते हुए इस दिशा में कदम बढ़ा दिया है. भारत ने भी हादी के आरोपियों को गिरफ्तार कर एक संदेश दे दिया है.

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