Bastar News Update : कोंडागांव। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के बाद भुगतान की धीमी प्रक्रिया से परेशान किसानों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर उतर आया। कोंडागांव जिले के फरसगांव क्षेत्र में सैकड़ों किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर चक्का जाम कर दिया। किसानों का आरोप है कि खाते में रकम होने के बावजूद सहकारी बैंक से एक बार में केवल 10 हजार रुपए ही दिए जा रहे हैं। इस वजह से अपनी ही मेहनत की कमाई निकालने के लिए किसानों को कई-कई बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस समय क्षेत्र में शादियों और मेलों का सीजन चल रहा है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। हाईवे जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और कुछ देर के लिए यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। करीब 15 मिनट तक नारेबाजी और विरोध के बाद किसानों ने जाम खत्म किया। हालांकि किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि भुगतान सीमा नहीं बढ़ी तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।

पानी बचाने के लिए खुद नदी में उतरे ग्रामीण

बस्तर। गर्मी से पहले जल संकट से बचने के लिए बस्तर ब्लॉक के ग्रामीणों ने अनोखी पहल की है। भोंड एनीकट के गेट लंबे समय से खुले होने के कारण पानी लगातार बहकर बर्बाद हो रहा था। शिकायत के बावजूद विभाग की कार्रवाई नहीं होने पर सात पंचायतों के करीब 250 ग्रामीण खुद नदी में उतर गए। ग्रामीण मिट्टी, रेत, पैरा और रस्सी लेकर एनीकट पहुंचे और गेट बंद करने का काम शुरू किया। कई घंटों की मेहनत के बाद छह में से चार गेट बंद कर दिए गए। बाकी दो गेट बंद करने का काम अगले दिन पूरा करने की योजना है। इस पहल से बस्तर और तोकापाल ब्लॉक की करीब 12 पंचायतों को फायदा मिलने की उम्मीद है। लगभग 60 हजार परिवारों और करीब 18 हजार हेक्टेयर खेती को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। ग्रामीणों का कहना है कि पानी रुकने से हैंडपंप और कुओं का जलस्तर भी बना रहेगा। वहीं विभाग का कहना है कि एनीकट मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, बजट मिलने के बाद स्थायी काम किया जाएगा।

पश्चिम एशिया तनाव का असर गैस सप्लाई पर

जगदलपुर। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों तक पहुंचने लगा है। पेट्रोलियम कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई को सीमित करने का फैसला किया है। इसके चलते होटल, रेस्टोरेंट और ठेला संचालकों के सामने परेशानी बढ़ने लगी है। बस्तर जिले में करीब ढाई हजार कमर्शियल गैस कनेक्शन संचालित हैं। इनमें सबसे अधिक कनेक्शन एचपी और इंडेन कंपनियों के बताए जा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि सिलेंडर की उपलब्धता कम होने से होटल कारोबार प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबा चला तो गैस की कीमतों और सप्लाई पर असर और बढ़ सकता है। हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई फिलहाल सामान्य बताई जा रही है। व्यापारी वर्ग आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

महुआ बीनने के लिए जंगलों में लगाई जा रही आग

बस्तर। महुआ सीजन के दौरान जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। कुछ ग्रामीण महुआ बीनने में आसानी के लिए जंगल की सूखी घास में आग लगा देते हैं। इससे हरे-भरे पेड़ों और छोटे पौधों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। कई क्षेत्रों में आग की वजह से जंगलों की हरियाली तेजी से कम हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जंगल इतने घने थे कि 100 मीटर दूर तक देखना भी मुश्किल होता था।
लेकिन अब कई जगह जंगल विरल होते जा रहे हैं। वन विशेषज्ञों के अनुसार आग और अवैध कटाई दोनों ही जंगलों को कमजोर कर रहे हैं। यदि समय रहते रोकथाम नहीं हुई तो जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों और वन विभाग से मिलकर आग रोकने के प्रयास तेज करने की जरूरत बताई जा रही है।

नक्सल प्रभावित गांवों में लगा स्वास्थ्य शिविर

सुकमा। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए सुरक्षा बलों ने पहल की है।
सुकमा जिले के मेटागुडेम-इरापल्ली इलाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 131वीं बटालियन ने मेडिकल कैंप लगाया। शिविर में आसपास के कई गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे। डॉक्टरों ने बच्चों के स्वास्थ्य, हीमोग्लोबिन स्तर और पोषण की जांच की। कुल 28 महिलाओं, 20 पुरुषों और 8 बच्चों का उपचार कर दवाइयां दी गईं। ग्रामीणों को गंभीर बीमारियों के लक्षण और बचाव के बारे में भी जानकारी दी गई। शिविर के दौरान ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई। सुरक्षा बलों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों से दूरस्थ गांवों में विश्वास और संपर्क मजबूत होता है। ग्रामीणों ने भी इस पहल को राहत भरा कदम बताया है।

मक्का प्रोसेसिंग प्लांट बंद, ग्रामीणों की नाराजगी जारी

कोंडागांव। मां दंतेश्वरी मक्का प्रोसेसिंग प्लांट बंद होने के बाद भी ग्रामीणों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। करीब एक माह से प्लांट परिसर में ताला लगा है और पुलिस की निगरानी जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट से आसपास के गांव प्रभावित हो रहे थे। इसके अलावा स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं मिलने से भी नाराजगी है। बताया जा रहा है कि प्लांट में 244 लोगों की भर्ती हुई, जिनमें बाहरी लोगों की संख्या ज्यादा है। किसानों का यह भी आरोप है कि नमी अधिक बताकर मक्का बार-बार वापस कर दिया जाता है। गांवों में नमी मापने की सुविधा नहीं होने से किसानों को बार-बार परिवहन खर्च उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार और किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाए। चेतावनी दी गई है कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो विरोध दोबारा तेज हो सकता है।

अबूझमाड़ में नया सुरक्षा कैंप, विकास को मिलेगा रास्ता

नारायणपुर। नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा और विकास को मजबूत करने के प्रयास तेज हो गए हैं। नारायणपुर जिले के ओरछा क्षेत्र के बोटेर गांव में नया सुरक्षा और जन सुविधा कैंप स्थापित किया गया है। इस अभियान में पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर और आईटीबीपी के जवानों ने संयुक्त कार्रवाई की। यह वर्ष 2026 में स्थापित होने वाला छठा नया कैंप बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार कैंप खुलने से सड़क निर्माण और विकास योजनाओं को गति मिलेगी। कांदुलनार, ओरछा और आसपास के कई गांवों को बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं का लाभ भी मिल सकेगा। सुरक्षा बलों का कहना है कि दशकों से अलग-थलग रहे क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ना ही लक्ष्य है। नए कैंप से ग्रामीणों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ने की बात भी सामने आ रही है।

बारिश से महुआ और आम की फसल को भारी नुकसान

दंतेवाड़ा। असमय हुई बारिश ने आदिवासी अंचल की वन उपज पर बड़ा असर डाला है। बैलाडीला और कुआकोंडा क्षेत्र में महुआ की फसल को भारी नुकसान हुआ है। जंगलों में सुखाया जा रहा महुआ बारिश और हवा से खराब हो गया। ग्रामीण बताते हैं कि महुआ को सूखने में तीन से चार दिन लगते हैं, लेकिन बारिश से वह काला पड़ जाता है। ऐसा महुआ बाजार में कम कीमत पर ही बिक पाता है। इन दिनों महुआ का भाव करीब 45 से 50 रुपए प्रति किलो बताया जा रहा है। इसके अलावा बारिश से आम के फूल भी झड़ गए हैं, जिससे उत्पादन घटने की आशंका है। किसानों का कहना है कि इस बार आम की बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन मौसम ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वन उपज पर निर्भर ग्रामीणों के लिए यह आर्थिक झटका माना जा रहा है।

जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर कलमुच्चे में 13 मार्च को

कांकेर। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार आमजनता की समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन शुक्रवार 13 मार्च को कांकेर विकासखण्ड के कलमुच्चे में जनसमस्या निवारण शिविर लगाया जाएगा। इसमें ग्राम पंचायत कलमुच्चे, पीढ़ापाल, मुरागांव, तुलतुली, मांदरी, कुरिष्टिकुर, कोकपुर, मालगांव, कोड़ेजुंगा और बारदेवरी ग्राम पंचायत के ग्रामीण अपनी मांगों व समस्याओं के समाधान के लिए शिविर में उपस्थित होंगे। उक्त शिविर में शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जाएगा, साथ ही योजनाओं का लाभ उठाने में कोई कठिनाई आ रही हो तो उसका समाधान भी शिविर में मौके पर किया जाएगा। कलेक्टर ने जनसमस्या निवारण शिविर में जिला, संबंधित ब्लॉक स्तरीय एवं क्लस्टर स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर ग्रामीणों की विभिन्न मांगों और समस्याओं का यथासंभव मौके पर निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

ग्राम पंडरीपानी में पीडीएस संचालन के लिए 23 मार्च तक आवेदन आमंत्रित

कांकेर। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कांकेर द्वारा विकासखण्ड नरहरपुर अंतर्गत ग्राम पंडरीपानी में शासकीय उचित मूल्य की दुकान आबंटित किए जाने के लिए इच्छुक पात्र एजेंसियों से आगामी 23 मार्च तक आवेदन आमंत्रित किया गया है। उचित मूल्य दुकान संचालन के लिए वृहत्ताकार आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, कृषि साख समितियों, वन सुरक्षा समितियों, महिला स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत एवं अन्य सहकारी समितियां जो शासकीय उचित मूल्य की दुकान संचालित करने के इच्छुक हैं, ऐसी संस्था से समस्त दस्तावेजों के साथ निर्धारित प्रारूप में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कांकेर में कार्यालयीन समय पर आवेदन आगामी 23 मार्च तक जमा करने कहा गया है।