सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए छत्तीसगढ़ शासकीय सेवक सेवा संघ नियम-2025 के संशोधन को लेकर अनियमित कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। फेडरेशन का आरोप है कि यह संशोधन गैर-जरूरी है और संविधान के अनुच्छेद 19(3) के तहत संघ बनाने के अधिकार का उल्लंघन करता है।

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छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने इसे अनियमित आंदोलन को कुचलने का असफल प्रयास बताया है। प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने एक बयान जारी कर कहा कि सरकार के इस कदम से लाखों अनियमित कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का मौका नहीं मिलेगा।

संशोधन की मुख्य बातें

नियम 2 के खंड (ख) में बदलाव कर ‘शासकीय सेवक’ की परिभाषा को केवल नियमित स्थापना में नियुक्त और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 लागू होने वाले व्यक्तियों तक सीमित कर दिया गया है। इसके बाद नया खंड (ग) जोड़ा गया है, जिसमें ‘शासकीय सेवक संघ’ को केवल उन संघों तक परिभाषित किया गया है जिनके सदस्य या पदाधिकारी वर्तमान में नियमित शासकीय सेवा में सेवारत हों।

फेडरेशन का कहना है कि यह प्रावधान अनियमित कर्मचारियों के संघों को मान्यता देने से रोकता है और उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास है।

अनियमित कर्मचारियों की स्थिति

प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में लाखों कर्मचारी विभिन्न रूपों में कार्यरत हैं, आउटसोर्सिंग (प्लेसमेंट), सेवा प्रदाता, ठेका, समूह/समिति के माध्यम से नियोजन, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, कलेक्टर दर, श्रमायुक्त दर, मानदेय और अस्थायी कर्मचारी। ये सभी नियमितीकरण की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्षरत हैं।

फेडरेशन का आरोप है कि सरकार शिक्षित बेरोजगार युवाओं को बंधुआ मजदूर बनाकर रख रही है। मजबूरी में ये लोग बेहद कम वेतन पर काम करने को विवश हैं।

फेडरेशन की मांग

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने इस अनियमित कर्मचारी विरोधी नियम को तुरंत निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि अनियमित कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस संशोधन पर पुनर्विचार किया जाए।

गोपाल प्रसाद साहू ने कहा कि पूर्व में भी समय-समय पर अनियमित कर्मचारी संघों ने इस तरह के नियमों पर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा, हम इस नियम की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।

यह मुद्दा छत्तीसगढ़ में अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण की लंबे समय से चली आ रही मांग को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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