Infosys LPG Shortage : भारत की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर कंपनी इंफोसिस ने बेंगलुरु, चेन्नई और पुणे में अपने सभी कैंपस के कर्मचारियों को बताया है कि कमर्शियल LPG गैस की सप्लाई में कमी की वजह से फूड कोर्ट सर्विस कुछ समय के लिए बंद हो सकती हैं.

11 मार्च को कर्मचारियों को भेजे गए एक ईमेल में, कंपनी ने बताया कि उसे LPG की उपलब्धता से जुड़ी एक समस्या आ रही है, जिसके कारण 12 मार्च से ऑपरेशनल बदलाव लागू होंगे. इस वजह से फूड कोर्ट के इंतजामों में बदलाव हुए हैं. कुछ खाने की चीजें कम कर दी गई हैं, और लाइव कुकिंग काउंटर अगली सूचना तक कुछ समय के लिए बंद कर दिए गए हैं.

कैंपस में मौजूद लाइव कुकिंग काउंटर पर आम तौर पर डोसा और ऑमलेट जैसी गरम डिश परोसी जाती हैं. अब इन्हें बंद किया जा रहा है क्योंकि होटल और रेस्टोरेंट तेज गैस पर पकाई गई डिश से दूर जा रहे हैं. बेंगलुरु कैंपस के डेवलपमेंट सेंटर में आम तौर पर रोज़ाना लगभग 20,000 कर्मचारी आते हैं. यह समस्या ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच कई इलाकों में LPG के इस्तेमाल को प्रभावित करने वाली बड़ी सरकारी गाइडलाइंस से जुड़ी है.

फूड कोर्ट के मेन्यू लिमिटेड होंगे

पुणे के कर्मचारियों को भेजे गए एक मैसेज में कहा गया, “फ़ूड कोर्ट वेंडर्स को अभी अपने सप्लायर से LPG की कमी हो रही है. सभी फ़ूड कोर्ट कुछ समय के लिए लिमिटेड मेन्यू के साथ फिर से खुलेंगे. कुछ पका हुआ खाना वेंडर्स के बाहरी सेंट्रल किचन से लिया जाएगा. इसके अलावा, इलेक्ट्रिक डिवाइस और बायोफ्यूल का इस्तेमाल करके खाना पकाने के दूसरे तरीकों को बढ़ाया जाएगा.

कंपनी ने कर्मचारियों को यह भी सलाह दी है कि वे कैंपस में ऐसे इवेंट्स प्लान न करें जिनमें केटरिंग की जरूरत हो और हो सके तो घर से खाना लाएं. चेन्नई कैंपस में कुछ फ़ूड कोर्ट आइटम भी कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं होंगे या लिमिटेड मात्रा में उपलब्ध होंगे.

इंफोसिस के 320,000 से ज्यादा कर्मचारी हैं, जिनमें से ज्यादातर भारत में हैं. अपने कैंपस में बायोगैस प्लांट और ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर का इस्तेमाल करके 100% ऑर्गेनिक वेस्ट (खाने का बचा हुआ हिस्सा और गार्डन का कचरा) को प्रोसेस करने की क्षमता डेवलप की है.

इससे बनी बायोगैस का इस्तेमाल फ़ूड कोर्ट के किचन में किया जाता है, और कम्पोस्ट का इस्तेमाल गार्डनिंग में किया जाता है. कंपनी की सालाना रिपोर्ट में ESG (एनवायरनमेंट, सोशल, गवर्नेंस) डिस्क्लोजर के अनुसार, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले स्लज को सोलर ड्राइंग ग्रीनहाउस में सुखाया जाता है. इस सूखे स्लज को फिर कम्पोस्ट के साथ मिलाकर कैंपस लैंडस्केपिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है.