अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज का सिविल अस्पताल इन दिनों मरीजों के इलाज के लिए नहीं, बल्कि अपनी बदहाली और डॉक्टरों की ‘साहबी’ के लिए चर्चा में है। जिस अस्पताल पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, वहां बुजुर्ग मरीजों को थप्पड़ मारे जा रहे हैं। ओपीडी के समय डॉक्टर गायब हैं, सफाई कर्मी हड़ताल पर हैं और पूरा अस्पताल राम भरोसे चल रहा है। ‘लल्लूराम डॉट कॉम’ की खबर का संज्ञान लेते हुए जब डिप्टी कलेक्टर पवन गोरैया औचक निरीक्षण करने पहुंचे, तो जो तस्वीरें सामने आईं, उसने प्रशासन के होश उड़ा दिए। 

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मऊगंज सिविल अस्पताल की ये तस्वीरें किसी नर्क से कम नहीं हैं। वार्डों में गंदगी का अंबार लगा है, मरीजों के बिस्तरों से चादरें नदारद हैं और चारों तरफ बदबू का आलम है। वजह साफ है—पिछले 5 महीनों से मानदेय न मिलने के कारण सफाई कर्मी हड़ताल पर हैं। अस्पताल की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है, और आउटसोर्स कर्मचारी भी 5 माह से मानदेय न मिलने के कारण परेशान है लेकिन जिम्मेदार मौन हैं।

लल्लूराम डॉट कॉम की खबर के बाद जब डिप्टी कलेक्टर पवन गोरैया  लाव-लश्कर के साथ अस्पताल पहुंचे, तो अव्यवस्थाओं का अंबार देख दंग रह गए। ओपीडी का समय था, लेकिन कुर्सियां खाली थीं। पता चला कि डॉक्टर अस्पताल आने के बजाय प्राइवेट प्रैक्टिस में मशगूल हैं। हाजिरी रजिस्टर में कॉमन सिग्नेचर के भरोसे उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जबकि हकीकत में डॉक्टर अस्पताल से नदारद मिले।

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अस्पताल में जान से खिलवाड़ का खेल यहीं खत्म नहीं होता। यहां एक्सरे करने की जिम्मेदारी एक ऐसे आउटसोर्स कर्मचारी पुष्पेंद्र पांडे के कंधों पर है, जिसके पास एक्सरे का कोई अनुभव ही नहीं है। इतना ही नहीं, मरीजों को मिलने वाले पौष्टिक नाश्ते का कहीं अता-पता नहीं है; अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके परिजन जमीन पर बैठ कर समोसे खाकर दिन गुजारने को मजबूर हैं। हद तो तब हो गई जब आंख दिखाने आए एक बुजुर्ग मरीज के साथ डॉक्टर ने सरेआम दुर्व्यवहार किया और उनके सिर पर थप्पड़ जड़ दिया। सेवा के नाम पर यहां गुंडागर्दी का नंगा नाच चल रहा है। सफाई कर्मियों ने ठेकेदार पर फर्जी पीएफ नंबर देने का गंभीर आरोप भी लगाया है।

हैरानी की बात यह है कि डिप्टी कलेक्टर के पहुंचते ही जो कर्मचारी भागे-भागे आए थे, उनके जाते ही अस्पताल फिर से खाली हो गया। यदि ‘सार्थक ऐप’ की लोकेशन और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं, तो स्वास्थ्य विभाग के बड़े भ्रष्टाचार और लापरवाही का खुलासा हो सकता है।

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