शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल नगर निगम में लोकायुक्त के छापे में करोड़ों के फर्जी बिल घोटाले का खुलासा हुआ है। नगर निगम में वाहन मरम्मत, रंग‑रोगन, सेंट्रल मोटर वर्कशॉप, जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के नाम पर काम दिखाकर फर्जी बिल बनाए गए, जबकि जमीन पर ऐसा काम हुआ ही नहीं है। इन फर्जी ई‑बिलों को निगम के SAP सॉफ्टवेयर के जरिये प्रोसेस कराकर करोड़ों रुपये का भुगतान रिश्तेदारों और परिचितों की फर्मों के खातों में ट्रांसफर कराया गया।

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फर्जी भुगतान ने बदले मोटा कमीशन लिया गया

लोकायुक्त की प्राथमिक जांच के बाद भोपाल नगर निगम के अपर आयुक्त वित्त गुणवंत सेवतकर खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच प्रभावित न हो इसलिए उन्हें कार्यमुक्त भी कर दिया गया है। लोकायुक्त की विशेष टीम ने नगर निगम के दोनों ऑफिसों पर छापेमारी कर कंप्यूटर, फाइलें और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए है। फर्जी फर्में या परिचितों की फर्में बनाकर उनके नाम से बिल तैयार किए गए, काम पूरा होने का विवरण डाला गया, फिर SAP में एंट्री करके भुगतान करा लिया गया। आरोप है कि इन भुगतान के बदले कमीशन भी ली गई होगी। निगम की कई और शाखाओं की फाइल देखी जा रही है।

कई अधिकारियों की संलिप्तता

मामले पर एक शिकायतकर्ता अजय पाटीदार ने बताया कि राजनीतिक संरक्षण के कारण पहले भी की गई शिकायतों पर कार्यवाही नहीं की गई। करोड़ों का घोटाला किया गया है। यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई अधिकारियों की मामले में संलिप्तता सामने आएगी। प्रदेश अधिकतर नगर निगमों और नगर पालिकाओं में यह खेल खेला जा रहा है।

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