सुप्रिया पांडेय, रायपुर। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आज छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र हुआ। सदन में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा, महिलाओं से संबंधित कई योजनाएं हैं, जो भारत सरकार की ओर से संचालित है। महिलाओं को सशक्त करने का काम मोदी सरकार में किया गया है। महिलाओं को आरक्षण देने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था, जिसे महिला विरोधी विपक्ष ने सदन में गिरा दिया।
मंत्री राजवाड़े ने कहा, केंद्र सरकार की ओर से जो बिल लाया गया है उसका विरोध विपक्ष की ओर से किया जा रहा है। मोदी सरकार तो आरक्षण के पक्ष में है। 2029 के चुनाव में आरक्षण देने के पक्षधर हैं, फिर भी विपक्ष का विरोध समझ से परे है।विपक्ष ने संशोधन विधेयक को पास न होने देकर महिलाओं की उड़ान को रोकने का काम किया है। उन्होंने कहा, संसद में विपक्ष दल के नेता प्रधानमंत्री पर अपशब्द का प्रयोग करते हैं। विपक्ष को ये नहीं दिखता, प्रधानमंत्री को अपमानित करने का काम विपक्ष ने किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्र निर्माण के अभियान में लगे हैं, लेकिन विपक्ष को यह रास नहीं आ रहा है। महिला आरक्षण को रोककर विपक्ष खुशी मना रहा है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा, मैं न तो प्रस्ताव के विरोध में हूं और न ही महिला आरक्षण के विरोध में हूं। मैं उस राजनीतिक प्रवृत्ति के खिलाफ हूं, जिसे परोसा जा रहा है। हमने तो यही सुना था कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि विशेष सत्र में निंदा प्रस्ताव लाया जा रहा है। मंत्रियों ने भी जोर-शोर से कहा था कि निंदा प्रस्ताव लाएंगे, लेकिन सदन पहुंचने के बाद पता चला कि परिसीमन प्रकिया को जल्द पूरी कर आरक्षण लागू किया जाए इस पर प्रस्ताव लाया गया है, लेकिन इस विषय पर सत्र बुलाने की कोई आवश्यकता थी क्या ? यह एक गैर जरूरी विशेष सत्र है। इसका कहीं कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि यहां प्रस्ताव पास होने का संसद में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने नेता प्रतिपक्ष की ओर से विशेष सत्र को गैर जरूरी कहे जाने पर आपत्ति जताई। आसंदी से इस शब्द को विलोपित करने और व्यवस्था देने की मांग की। उन्होंने कहा, संवैधानिक प्रकिया को गैर जरूरी कहना उचित नहीं है। अजय चंद्राकर ने कहा, कांग्रेस ने महिला आरक्षण की बात की ही नहीं है। भारत की हर परंपरा में महिलाओं का स्थान है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने का काम किया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अजय चंद्राकर को मेरे इस शब्द से आपत्ति है तो मैं दूसरे शब्दों के साथ कहता हूं। क्या सदन में जो बिल पास नहीं हुआ उसके लिए विपक्ष की निंदा करने विधानसभा में सत्र बुलाया जाए क्या यह सही है ? संसद में बिल पास नहीं हुआ क्या सदन में कांग्रेस की निंदा की जा रही है, क्योंकि बिल तो संसद में पेश हुआ था, बिल संसद में गिरा था तो क्या निंदा संसद की होगी। सत्ता पक्ष यही चाहता है।
महंत ने कहा, महिला आरक्षण का जो बिल 2023 में सर्वसम्मति से संसद में पास हुआ था उसे लागू कर दिया जाना चाहिए था। इस पर अलग संसोधन लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी ? इसके पीछे की मंशा क्या है ? कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष आरक्षण के पक्ष में है। हमने तो कहीं विरोध किया नहीं. लेकिन संसद के बाहर राजनीतिक रूप से बदनाम करने का किया जा रहा है। नारी शक्ति के नाम पर संसद के बाहर इवेंट चल रहा है। उन्होंने कहा, नारी शक्ति को अधिकार देने का काम कांग्रेस ने किया है। आजादी से पहले से लेकर बाद में कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष महिलाएं रही, लेकिन भाजपा की सरकार विधानसभा की गैलेरी में बैठाकर महिलाओं का सम्मान करना चाहती है। इसके लिए बकायदा जनसम्पर्क अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। कांग्रेस सरकार में महिलाओं को अधिकार देने के लिए कई कानून केंद्र में बने, इसके अनगिनत उदाहरण हैं।
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