बांग्लादेश की सरकार ने गाइबंदा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में श्री श्री राधा गोविंद और काली मंदिर में भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा के निर्माण को निलंबित करने का आदेश दिया है। कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों के दबाव में लिए गए इस फैसले से हिंदुओं में रोष है। काले पत्थर से बनाई जा रही इस विशाल प्रतिमा की लागत भारतीय मुद्रा में 17 करोड़ रुपये है। इस परियोजना पर खर्च होने वाले 22 करोड़ रुपये श्रद्धालुओं ने दान में दिए हैं।
प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे कट्टरपंथी संगठनों ने अधूरी संरचना गिराने तक की मांग की है। इमाम-उलमा परिषद ने प्रोजेक्ट पूरी तरह रद्द करने, भविष्य में ऐसी किसी पहल पर रोक लगाने और फंडिंग की जांच कराने की मांग रखी है। वहीं मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने मंदिर के आडिटोरियम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस निर्णय ने तीव्र प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं, जिसमें आलोचकों का आरोप है कि यह निलंबन उन इस्लामिक समूहों के दबाव में आया है जो इस परियोजना के खिलाफ हैं।
हमारी संप्रभुता पर असर पड़ेगा- कट्टरपंथी
कट्टरपंथी संगठन इमाम-उलमा परिषद और अन्य ने इस प्रोजेक्ट की फंडिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि खुफिया एजेंसियां जांच करें कि क्या किसी विदेशी सरकार या संगठन से पैसा तो नहीं आया है।
इस मांग में परोक्ष रूप से भारत की ओर इशारा माना जा रहा है। विरोधियों ने इस पहल से जुड़े लोगों के बैंक खातों व संपत्तियों की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट का हमारी संप्रभुता पर असर होगा।
परिसर में पहले से 100 से ज्यादा देवी-देवताओं की मूर्तियां
बता दें कि यह निर्माण 2025 की शुरुआत में निजी फंडिंग से शुरू हुआ था। परिसर में पहले से 100 से ज्यादा देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। इनमें 30 फीट की शिव प्रतिमा और 53 फीट की कृष्ण प्रतिमा भी शामिल है। राम प्रतिमा को एशिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा के रूप में पेश किया जा रहा था। इस परियोजना पर 17 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने थे।
बीते दो साल में दो और प्रोजेक्ट पर लग चुकी है रोक
राम प्रतिमा प्रोजेक्ट से पहले भी दो साल में हिंदू आस्था से जुड़े 2 प्रोजेक्ट पर रोक लग चुकी है। 2025 में कट्टपरंथियों के विरोध पर ढाका में दुर्गा मंदिर प्रशासन ने गिराई। 2024 में ढाका के उत्तरा में दुर्गा पूजा मूर्ति स्थापना पर आपत्ति के बाद उसकी जगह बदलनी पड़ी।
एक ही मंदिर से मुसलमानों के अस्तित्व पर संकट कैसे ? – तस्लीमा नसरीन
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने राम मंदिर के निर्माण के खिलाफ चारों ओर से धमकियों, भड़काने और शत्रुतापूर्ण बयानबाजी की कड़ी निंदा की। नसरीन ने एक्स पर कहा, ‘बांग्लादेश में कई लाख मस्जिदें हैं और देश भर में नई मस्जिदें बनती जा रही हैं। तो भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण के खिलाफ इतना विरोध क्यों है?’ नसरीन ने कहा, ‘पलाशबाड़ी में हिंदू मंदिरों पर हमलों और मूर्तियों के अपमान का इतिहास देखते हुए स्थिति चिंताजनक है। इसने अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को असुरक्षित महसूस कराया। कई इस्लामी देश जैसे-इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मलेशिया और ओमान में विशाल हिंदू मंदिर हैं। फिर, बांग्लादेश में एक ही मंदिर के निर्माण को कुछ मुसलमान अस्तित्व के संकट के रूप में क्यों पेश कर रहे हैं?’
दो साल में हिंदुओं पर 2,839 हमले व 100 हत्याएं
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर 2,839 हमले हुए हैं। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, 4-20 अगस्त 2024 के बीच 2,010 घटनाएं हुईं। 2025 में 522 तो 2026 के पहले 3 महीनों में 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 100 से ज्यादा हत्याएं, यौन हिंसा, घर-दुकान पर हमला, मंदिरों-प्रतिमाओं की तोड़फोड़, लूट, आगजनी और जमीन कब्जे जैसी घटनाएं शामिल हैं।
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