आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ का एक बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. जिसमें वे कह रहे हैं कि हम चमड़ा उतारना भी जानते हैं और उसको सिर पर पटककर मारना भी. वे एक आंदोलन का समर्थन करने पहुंचे थे. जहां उन्होंने ये बातें कही. माना जा रहा है कि ये बातें उन्होंने करणी सेना के एक पदाधिकारी के बयान पर पलटवार करते हुए कही हैं.
आजाद कह रहे हैं कि ‘हम संघर्ष करने वाले लोग हैं, हम धमकियों से तो नहीं डरते, मैं तो संवैधानिक व्यक्ति हूं. लेकिन हम चमड़ा उतारना भी जानते हैं उसका जूता बनाना भी, और समय आने पर उसको सिर पर पटक मारना भी जानते हैं. तो हम बड़े सज्जन लोग हैं, संविधान को मानने वाले लो हैं. लेकिन डरते किसी से नहीं है, जो संवैधानिक मूल्य है उनके खिलाफ नहीं जाएंगे. ये जो आंदोलन है उसको खून के आखरी कतरे तक सींचना है. आजाद ने प्रदेश में बढ़ रही अपराधिक गतिविधियों को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री कहते है कि हर चौराहे पर यमराज खड़े हैं, मगर लेकिन गुंडे भाजपा से जुड़े होते है तो यमराज छुट्टी पर चले जाते हैं. उन्होंने कहा कि गारंटी देता हूं कि 20 मार्च 2020 को हमने पार्टी बनाई. मैंने किसी धर्म पर टिप्पणी नहीं की। बदनाम किया जा रहा है.
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बता दें कि चंद्रशेखर जन सामान्य के मुद्दों को उठाकर सुर्खियों में बने रहते हैं. अपने बयानों के लिए भी अक्सर चर्चा में रहते हैं. हाल ही में उन्होंने नोएडा में सफाईकर्मियों और प्राधिकरण के बीच तनातनी को लेकर कर्मचारियों के समर्थन में आए. उन्होंने सोमवार को हुई यूनियन के नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर अथॉरिटी पर निशना साधा है. उन्होंने कहा है कि नोएडा अथॉरिटी के तुगलकी फरमान के खिलाफ दो दिन से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सफाईकर्मियों, जिनमें महिला सफाईकर्मी भी शामिल हैं, को आज सुबह पुलिस हिरासत में लिया जाना बेहद निंदनीय ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है.
मेहनतकशों की आवाज दबाई जा रही- चंद्रशेखर
आजाद ने कहा कि ‘सफाईकर्मियों का कहना है कि उनसे झाड़ू लगाने और नियमित सफाई कार्य के अलावा जबरन सिविल कार्य भी कराए जा रहे हैं, और अतिरिक्त काम से इनकार करने पर नौकरी छीनने व वेतन काटने जैसे दमनकारी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. उनका यह भी कहना है, “पहले हमारा काम केवल सड़कों और नालियों की सफाई तक सीमित था, लेकिन विभागों के विलय के बाद हमसे निर्माण मलबा उठाने, डिवाइडर और पैदल मार्गों पर काम जैसे सिविल कार्य भी कराए जा रहे हैं और वेतन पहले जितना ही दिया जा रहा है ” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की मजदूर विरोधी सोच और सत्ता के अहंकार का प्रमाण है कि मेहनतकशों की आवाज़ दबाई जा रही है, शांतिपूर्ण विरोध को कुचला जा रहा है और श्रमिक अधिकारों को रौंदा जा रहा है. हम उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि सभी साथियो को तुरंत छोड़ा जाए और सीईओ नोएडा का ये तुगलकी फरमान तुरंत वापस ले, अन्यथा यह आंदोलन पूरे प्रदेश में होगा.’
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