Chaitra Navratri 2026/Nav samvatsar 2083. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (19 मार्च) से चैत्र नवरात्र (वासंती नवरात्र) की शुरुआत होने जा रही है. ये नौ रातें मां भगवती की उपासना में विशेष मानें जाते हैं. 9 दिनों तक घर-घर में भगवती की विशेष आराधना होगी. नवरात्र के प्रथम दिन से घट स्थापना के साथ ही पूजा की शुरुआत होती है. जो विधिवत 9 दिनों तक चलती है. श्रीराम नवमी के साथ इसका समापन होता है. इस साल श्रीराम नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी. चैत्र नवरात्र के साथ ही भारतीय संस्कृति और पंचांग के अनुसार नए संवत्सर (नया साल) की शुरुआत होती है. सनातन संस्कृति में इसी के अनुसार सालभर सारे तीज-त्योहार मनाए जाते हैं. उत्तर प्रदेश के सभी मंदिरों विशेषकर देवी मंदिरों और घरों में नवरात्र और नए वर्ष (nav samvatsar 2083) की तैयारियां पूरी हो चुकी है. कल सुबह सुर्योदय के साथ ही धूमधाम से नव वर्ष मनाया जाएगा.
बता दें कि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी. इसी के साथ नवरात्र और नव संवत्सर का आरंभ होगा. 9 दिनों तक चलने वाला यह पर्व परंपरागत रूप से घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ आरंभ होता है, जो एक शुभ मुहूर्त में देवी का आह्वान करने के लिए किया जाता है. घटस्थापना का उद्देश्य घर में सुख- शांति की स्थापना करना है. इसे करने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव समाप्त होते हैं. परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करते हैं, जिससे आपसी प्रेम और सौहार्द की भावना बढ़ती है.
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गौरतलब है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर नव वर्ष को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. यह अलग-अलग प्रांतों में विभिन्न तरीके से मनाया जाता है. जैसे- महाराष्ट्र में नव वर्ष को गुड़ी पाड़वा के नाम से जाना जाता है, दक्षिण भारत में इसे उगादी के नाम से जाना जाता है. नाम भले ही अलग हों लेकिन सनातन संस्कृति के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही समूचे भारत में नव वर्ष मनाया जाता है.
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