वाराणसी. गंगा जी में इफ्तार के दौरान बिरयानी पार्टी करने वाले मामले में 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है. एसीपी कोर्ट ये याचिका खारिज की है. जिसके बाद सभी आरोपी न्यायिक रिमांड पर भेजे गए हैं. दो दिन बाद कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई होगी. इस मामले को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है. एक तरफ भाजपा इसे गलत बता रही है. तो वहीं विपक्ष ने पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया है. हालांकि सपा से पूर्व सांसद एसटी हसन ने इस इफ्तार को गलत बताया है. लेकिन दूसरी तरफ उनके नेता अखिलेश यादव इस मामले में पुलिस की ही चुटकी ले रहे हैं. अखिलेश ने कहा कि पुलिस को इफ्तार पार्टी नहीं दी होगी इसलिए ये कार्रवाई हुई.

एसटी हसन ने इस पूरे मामले में युवकों की गलती बताई है. उनका कहना है कि अगर यह बनारस के उन घाटों पर किया गया है, जहां गंगा आरती भी होती है, तो यह सही नहीं है. युवकों ने इफ्तार के दौरान हड्डी खाकर उसे वहां फेंका है तो ये और भी गलत है. असल में इफ्तार कहीं भी किया जा सकता है. यह जरूरी नहीं है कि इफ्तार बनारस घाट पर किया जाए, ये किसी दूसरी जगह भी किया जा सकता था.

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बनारस में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव एसएम यासीन का कहना है कि कुछ जाहिल नाव पर रोजा इफ्तार कर रहे थे. इस्लाम में इसके लिए कहीं जगह नहीं है इफ्तार एक शुद्ध धार्मिक कार्य है. यह कोई सैर या पिकनिक नहीं है. इफ्तार के बाद तुरंत मगरिब की नमाज जरूरी है. इन जाहिलों को इनके घरवालों ने क्या सिखाया है? इस्लाम को बदनाम करने का मौका दिया है. इस कृत्य की जितनी भी निंदा की जाए कम है.

ये है पूरा मामला

दरअसल, बनारस में गंगा नदी पर सोमवार शाम एक युवक ने रोजा इफ्तार का कार्यक्रम रखा था. उसने रोजेदारों को गंगा घाट पर बुलाया. यहां एक बड़ी नाव पहले से बुक की गई थी. इसके बाद सभी लोग अस्सी घाट से नमो घाट तक नाव से गए. वहां नाव पर मौजूद रोजेदारों ने पहले नमाज पढ़ी. फिर खजूर और फल खाकर रोजा खोला. दूसरे वीडियो में नाव पर बैठे लोग बड़े भगोने से कुछ निकालकर खाते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद वबाल मच गया.