ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका के साथ मध्यस्थता के लिए सशर्त सहमति जताई है। इन शर्तों में ईरान पर हमलों को तत्काल रोकना और भविष्य में हमले न होने की विश्वसनीय गारंटी देना शामिल है। न्यूज18 ने शीर्ष राजनयिक सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है। इस कदम को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच एक संभावित राजनयिक अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान ने रखीं ये शर्तें
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने के लिए 5 प्रमुख शर्तें रखी हैं। एक अहम मांग यह है कि ईरान के खिलाफ हमले तुरंत बंद हो और अमेरिका-इजरायल भविष्य में उस पर कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे। ईरान ने पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की से भी गारंटी मांगी है कि ये चारों देश यह सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे कि अमेरिका ईरान की चिंताओं का समाधान करे।
पाकिस्तान ने तेज किए राजनयिक प्रयास
समाचार एजेंसी AFP ने बताया कि पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत को सुविधाजनक बनाने के लिए राजनयिक प्रयासों को तेज कर दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के फोन पर बात की, जिसमें उन्होंने तनाव कम करने और सुरक्षा गारंटी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए जा रहे राजनयिक प्रयासों के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात की।
पाकिस्तान में हो रही अहम बैठक
पाकिस्तान में तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की बैठक हो रही है। तीनों विदेश मंत्री पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से भी मुलाकात करेंगे। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने संकेत दिया कि वार्ता में संघर्ष की दिशा का मूल्यांकन करने और तनाव रोकने के लिए कार्रवाई योग्य कदम तलाशे जाएंगे। रॉयटर्स ने बताया कि विदेश मंत्री तनाव कम करने और बातचीत की दिशा में एक रास्ता खोजने के उद्देश्य से तंत्रों पर गहन चर्चा करेंगे।
अमेरिका पश्चिम एशिया में बढ़ा रहा सैन्य तैनाती
शांति वार्ता के प्रयासों के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है। अमेरिकी युद्धपोत USS त्रिपोली करीब 3,500 सैनिकों को लेकर इस इलाके में पहुंच गया है। इस पर हेलीकॉप्टर, MV-22 ओस्प्रे और F-35B जैसे लड़ाकू विमान भी तैनात हैं। एक और अमेरिकी विमान वाहक पोत USS जॉर्ज HW बुश भी अमेरिका से रवाना होकर पश्चिम एशिया की ओर बढ़ रहा है। इससे ईरान में जमीनी अभियान की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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