Donald Trump on Russian oil: ईरान के साथ चल रहे युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट (Strait of Hormuz crisis) के बीच रूसी तेल पर डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर यू-टर्न मारा है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए फिर से अस्थायी छूट दे दी है। दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छूने के दबाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत समेत विभिन्न देशों को रूसी तेल खरीदने की छूट दी है। पहले अमेरिका ने रूसी तेल खरीद छूट को 11 अप्रैल से आगे बढ़़ाने से इनकार किया गया था। अब नए नोटिफिकेशन में 16 मई तक रूस से तेल खरीदने की छूट दी है।
अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट (US Treasury Department on Russian oil) ने 17 अप्रैल से छूट के लिए नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत देशों को रूसी तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीदने की अनुमति 16 मई तक दी गई है। यानी करीब एक महीने तक समुद्र में लोड किए गए रूसी तेल की खरीद पर कोई अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के वित्त विभाग ने शुक्रवार देर रात इसको लेकर लाइसेंस जारी किया है। इसके बाद 16 मई तक रूसी तेल से लदे जहाजों को लेनदेन की अनुमति मिल गई है। यह कदम ट्रंप के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा सार्वजनिक रूप से यह संकेत देने के ठीक दो दिन बाद आया है कि इस तरह की छूट को बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। यह नई अनुमति पिछली 30-दिन की छूट के बाद लागू होगी, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी। हालांकि यह विशिष्ट शर्तों के तहत निरंतर खरीदारी की अनुमति देती है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े लेनदेन को बाहर रखती है। यानी इस छूट के तहत कोई भी देश ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से तेल नहीं खरीद सकेगा।
यू-टर्न क्यों लेना पड़ा?
ईरान के साथ चल रहे युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर भारी असर पड़ा है। दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई इसी रूट से होती है। जैसे ही इस रास्ते पर खतरा बढ़ा, तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली गईं। अमेरिका के सामने चुनौती ये थी कि अगर सप्लाई और कम हुई, तो कीमतें और बढ़ेंगी, जिसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ेगा. इसलिए ट्रंप प्रशासन ने बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए यह अस्थायी राहत दी। रूस के राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रिएव के मुताबिक, पहले छूट से करीब 100 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल बाजार में आ सकता था, जो लगभग एक दिन की वैश्विक खपत के बराबर है। ऐसे में नई छूट से भी सप्लाई को सहारा मिलने की उम्मीद है।

होर्मुज प्रभावित होने से तेल महंगा हुआ था
जंग के बाद ईरान ने होर्मुज रूट लगभग बंद कर दिया था। दुनिया का करीब 20% तेल-गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से कच्चा तेल, LPG, एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक महंगे हुए थे। ब्रिटेन-यूरोप में दवाओं और जरूरी चीजों की कमी का खतरा बढ़ा, क्योंकि शिपिंग खर्च कई गुना बढ़ गया था। इस सप्लाई संकट के कारण अमेरिका में गैस की कीमतें 4.15 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थीं और महंगाई दर में भी उछाल आया था।
होर्मुज रूट खुलने के बाद कच्चा तेल 13% सस्ता
इधर ईरान के होर्मुज रूट को कॉमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह खोलने के ऐलान के बाद क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 13% सस्ता हुआ है। शुक्रवार, 17 अप्रैल को दाम करीब 13 डॉलर गिरकर 86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। एक दिन पहले क्रूड ऑयल की कीमत 99.39 डॉलर प्रति बैरल थी। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल था। जंग के दौरान 9 मार्च को दाम बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए थे।
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