केंद्र की मोदी सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने पने कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) दो प्रतिशत बढ़ा दिया है। ये फैसला 1 जनवरी से लागू होगा। बढ़ती महंगाई के इस दौर में यह बढ़ोतरी कुछ राहत लेकर आई है। जानकारी के अनुसार सरकार ने DA 58% से बढ़कर 60% किया है। इस फैसले से सरकारी खजाने पर सालाना 6,791 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इससे पहले अक्टूबर में महंगाई भत्ते को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था। पिछला रिविजन 1 जुलाई 2025 से प्रभावी माना गया था, जिसका भुगतान एरियर के साथ किया गया था।

50.5 लाख कर्मचारियों और 68.3 लाख पेंशनर्स को फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार (18 अप्रैल) को दिल्ली में हुई कैबिनेट बैठक में इसका ऐलान किया गया। इससे लगभग 50.5 लाख कर्मचारियों और 68.3 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। केंद्र सरकार साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बदलाव करती है। इस फैसले से कर्मचारियों की मंथली सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन में इजाफा होता है।

क्या है DA और यह क्यों जरूरी है?

महंगाई भत्ता (DA) सरकारी कर्मचारियों को दिया जाने वाला ‘कॉस्ट-ऑफ-लिविंग’ एडजस्टमेंट है। इसका कैलकुलेशन बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में किया जाता है। इसका मुख्य मकसद बढ़ती कीमतों के बीच कर्मचारियों की वास्तविक आय की सुरक्षा करना है, ताकि उनकी सैलरी महंगाई के साथ तालमेल बिठा सके।

8वें वेतन आयोग में बेसिक पे ₹69,000 करने की मांग

सरकार को सौंपे गए एक ज्ञापन में नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने वेतन में भारी बढ़ोतरी की मांग की है। इसमें न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये और फिटमेंट फैक्टर 3.83 रखने की मांग शामिल है। अगर यह मांग मान ली जाती है तो न्यूनतम मूल वेतन मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा वेतन ढांचे में एक बड़ा बदलाव होगा। अन्य मांगों में 6 प्रतिशत की वार्षिक वेतन वृद्धि, एचआरए की न्यूनतम सीमा 30 प्रतिशत और पुरानी पेंशन योजनाओं की बहाली शामिल है।

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