गया। बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। मुजफ्फरपुर के खबरा में परशुराम जयंती महोत्सव में शामिल होने पहुंचे अतरी (गया) से हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के विधायक रोमित कुमार ने राज्य सरकार के इस महत्वाकांक्षी कानून पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शराबबंदी के मौजूदा स्वरूप के कारण बिहार, विशेषकर गया और बोधगया जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्रों का ‘डाउनफॉल’ हो रहा है।
कानून का क्रियान्वयन और गरीबों पर मार
विधायक रोमित कुमार ने कहा कि शराबबंदी कानून की मंशा अच्छी है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हैं। उन्होंने चिंता जताई कि इस कानून की आड़ में बड़े शराब माफिया और तस्कर अक्सर कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं, जबकि समाज का गरीब और वंचित वर्ग इसका शिकार बन रहा है। गरीब लोगों की गिरफ्तारी के बाद उनके लिए भारी जुर्माना भरना और जमानत की प्रक्रिया पूरी करना एक बड़ी चुनौती बन जाती है, जिससे उनका पूरा परिवार आर्थिक संकट में फंस जाता है।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर मंडराता खतरा
रोमित कुमार ने विशेष रूप से गया और बोधगया के गिरते पर्यटन ग्राफ पर चर्चा की। उन्होंने तर्क दिया कि गया एक वैश्विक पर्यटन स्थल है जहां भारी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। विदेशी सैलानियों के खान-पान और जीवनशैली में शराब एक सामान्य हिस्सा है। जब इन अंतरराष्ट्रीय केंद्रों पर पूर्ण प्रतिबंध होता है, तो पर्यटक बिहार आने के बजाय अन्य राज्यों का रुख कर लेते हैं। विधायक ने जोर देकर कहा, बोधगया जैसे प्रमुख स्थल का डाउनफॉल इसी वजह से हो रहा है। अगर हमें स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है, तो पर्यटन के नजरिए से इस कानून की समीक्षा अनिवार्य है।
नेतृत्व और नीतीश कुमार के विकास कार्यों की सराहना
मुख्यमंत्री पद और नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर विधायक ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में नीतीश कुमार ने बिहार के विकास की जो नींव रखी है, वह अतुलनीय है। उन्होंने सुशासन के रोडमैप को आगे बढ़ाने की बात कही। साथ ही, सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने भरोसा जताया कि डिप्टी सीएम के रूप में उनके अनुभव का लाभ अब पूरे प्रदेश को मिलेगा।
खत्म नहीं, समीक्षा है जरूरी
रोमित कुमार ने अपनी बात समाप्त करते हुए स्पष्ट किया कि वे शराबबंदी को पूरी तरह खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि इसकी व्यावहारिक समीक्षा चाहते हैं। उनका मानना है कि नियमों में लचीलापन लाने से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि बिहार का टूरिज्म सेक्टर भी फिर से विश्व पटल पर मजबूती से उभर सकेगा।
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