चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के मिड-डे-मील को लेकर शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और निर्णायक फैसला लिया है ताकि गैस सिलेंडर की किल्लत बच्चों की थाली में रुकावट न बन सके।

मौलिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि किसी कारणवश एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पाता है, तो वैकल्पिक ईंधन के तौर पर सूखी लकड़ियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह कदम मुख्य रूप से उन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लिए उठाया गया है जहां लॉजिस्टिक समस्याओं या देरी के कारण अक्सर समय पर गैस रिफिल नहीं पहुंच पाती और बच्चों का खाना बनाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

इमरजेंसी के लिए स्कूलों को रखना होगा सूखी लकड़ियों का स्टॉक

विभाग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों को अब आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही सूखी लकड़ी का प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा ताकि भोजन की निरंतरता बनी रहे।

कुकिंग कॉस्ट फंड से होगा भुगतान

लकड़ी खरीदने पर होने वाले खर्च की भरपाई मिड-डे-मील के लिए निर्धारित कुकिंग कॉस्ट फंड से की जाएगी, जिससे स्कूल प्रबंधन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

अधिकारियों ने सख्त हिदायत दी

हालांकि अधिकारियों ने सख्त हिदायत दी है कि लकड़ी का उपयोग करते समय धुएं के प्रबंधन और विद्यार्थियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए ताकि वैकल्पिक व्यवस्था के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।