बीजापुर। बीजापुर के अति अंदरूनी इलाकों से अब बदलाव की नई तस्वीर सामने आ रही है। जो गांव कभी नक्सली प्रचार के केंद्र माने जाते थे, वहां अब जनजागरूकता की गूंज सुनाई दे रही है। पहले जहां भय के साए में चेतना नाट्य मंडलियों का मंचन होता था, अब वहां वन संरक्षण के संदेश दिए जा रहे हैं।
ग्रामीण पहली बार खुले मन से नुक्कड़ नाटक देख रहे हैं और उत्साह से भागीदारी कर रहे हैं। कार्यक्रमों में जंगलों में आग नहीं लगाने और महुआ संग्रहण में सावधानी बरतने की अपील की गई। तेंदूपत्ता तोड़ाई के दौरान वन्यजीवों को नुकसान नहीं पहुंचाने का संदेश भी दिया गया। हल्बी, गोंडी, हिंदी और तेलुगु भाषा में ग्रामीणों को जागरूक किया गया। वनों के महत्व, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन पर विशेष जानकारी दी गई।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह अभियान बड़ा संदेश माना जा रहा है। जहां कभी बंदूक की भाषा थी, वहां अब संवाद की संस्कृति लौट रही है। बीजापुर की यह तस्वीर बताती है कि शांति आने पर विकास खुद रास्ता बना लेता है। नक्सल प्रभावित इलाकों में यह बदलाव आने वाले समय की उम्मीद बन गया है।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के आगमन से शिवमय हुआ शहर
जगदलपुर। बस्तर की धरती सोमवार को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आई। सोमनाथ मूल ज्योतिर्लिंग के पावन अंशों के आगमन ने शहर को शिवमय बना दिया। बाल विहार परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया गया।
हजारों वर्षों की आस्था से जुड़े इन पवित्र अवशेषों के दर्शन को लोग सौभाग्य मानते दिखे। सामूहिक भजन और ध्यान सत्र ने माहौल को और दिव्य बना दिया। श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का दुर्लभ अवसर बताया। कार्यक्रम में अनुशासन, व्यवस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने मिला।
स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभालकर मिसाल पेश की। सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और शहर के प्रबुद्धजन भी शामिल हुए। आयोजन ने सनातन संस्कृति और एकता का संदेश दिया। जगदलपुर के इतिहास में यह आयोजन प्रमुख आध्यात्मिक क्षण के रूप में दर्ज हो गया।
बस स्टैंड में यात्री बेहाल, पंखे बंद और गर्मी का संकट
जगदलपुर। लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए बस स्टैंड यात्री प्रतीक्षालय की हालत बदहाल है। 15 पंखों में से 10 महीनों से बंद पड़े हैं, जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। गर्मी, उमस और मच्छरों के बीच मुसाफिर रात गुजारने को मजबूर हैं। जो पांच पंखे चल रहे हैं, उनसे भी पर्याप्त हवा नहीं मिल रही।
बस स्टैंड से रोजाना 200 से ज्यादा बसें विभिन्न क्षेत्रों के लिए रवाना होती हैं। शाम के बाद अंदरूनी इलाकों के लिए बसें बंद होने से सैकड़ों यात्री यहीं रुकते हैं। बारिश में प्रतीक्षालय की छत से पानी टपकने की शिकायत भी सामने आती रही है। करंट के डर से बरसात में पंखे बंद रखे जाते हैं।
सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। कई बार शिकायत के बाद भी सुधार नहीं हुआ। अंतरराज्यीय बस स्टैंड की यह तस्वीर व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
मलेरिया पर निर्णायक वार, गांव-गांव चलेगा जनअभियान
बस्तर। बस्तर को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा अभियान शुरू किया है। विश्व मलेरिया दिवस 25 अप्रैल से जागरूकता कार्यक्रम तेज किए जाएंगे। संवेदनशील क्षेत्रों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर विशेष फोकस रखा गया है।
स्कूली बच्चों को मलेरिया विरोधी ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा। चित्रकला प्रतियोगिताओं के जरिए जागरूकता फैलाने की तैयारी है। मितानिनों को गांव-गांव नारे लिखकर लोगों को जागरूक करने का जिम्मा दिया गया है। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को भी जोड़ा जाएगा। पारंपरिक मान्यताओं और स्वास्थ्य सलाह को जोड़ने के लिए विशेष सम्मेलन होंगे।
वर्ष 2005 की तुलना में जिले में मलेरिया दर में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। अब लक्ष्य 2027 तक शून्य मलेरिया हासिल करना है। स्वास्थ्य विभाग ने जमीनी मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग को भी अनिवार्य किया है। बस्तर अब बीमारी नहीं, जागरूकता से पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है।
लौह अयस्क की धूल से गांवों का दम घुटा
जगदलपुर। रायकोट और बड़े आरापुर क्षेत्र में धूल प्रदूषण ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लौह अयस्क साइडिंग कार्य से उड़ रही धूल गांवों तक पहुंच रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के अभाव में समस्या लगातार बढ़ रही है। घर के बाहर कपड़े सुखाना तक मुश्किल हो गया है। घरों की छत, आंगन और सामान पर काली परत जम रही है। कई लोग खांसी और सांस की परेशानी से जूझ रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा बताया जा रहा है। पेड़-पौधे तक धूल से प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई है। लेकिन राहत के ठोस कदम अब तक नजर नहीं आए। लोगों ने स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा की मांग उठाई है। विकास के नाम पर लोगों की सांसें संकट में पड़ती दिख रही हैं।
भूमिपूजन हुआ, सड़क गायब… ग्रामीणों में भारी आक्रोश
बकावंड। संधकरमरी गांव में सीसी सड़क निर्माण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। भूमिपूजन के बाद भी सड़क निर्माण शुरू नहीं होने से लोग नाराज हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्वीकृत सड़क दूसरे गांव में बना दी गई। वर्ष 2024 में गांव में दो सड़कों की घोषणा हुई थी। लोगों को उम्मीद थी कि वर्षों पुरानी समस्या खत्म होगी। लेकिन समय बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों ने इसे कमीशनखोरी और भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
कहा जा रहा है कि राशि नहीं देने पर योजना बदली गई। ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। लोगों ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं हुई तो जवाब चुनाव में देंगे। मामला विकास कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रहा है। अब नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।
अबूझमाड़ के जंगलों में दिखा दुर्लभ लेपर्ड गेको
नारायणपुर। नारायणपुर जिले के कोडिल्यार क्षेत्र से दुर्लभ जीव दिखने की खबर चर्चा में है। रात गश्त के दौरान जवानों ने लेपर्ड गेको का वीडियो रिकॉर्ड किया। विशेषज्ञ इसे जैव विविधता का सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। ऐसी प्रजातियां उन्हीं क्षेत्रों में मिलती हैं जहां पर्यावरण संतुलित हो। दुर्लभ छिपकली का रंग और बनावट इसे अलग पहचान देते हैं।
अबूझमाड़ के जंगलों की समृद्धि एक बार फिर सामने आई है। लेकिन इसी क्षेत्र में विकास और खनन गतिविधियों की आहट भी है। ऐसे में संरक्षण बनाम विकास की बहस तेज हो सकती है। स्थानीय लोग पहले भी दुर्लभ जीव दिखने की बातें बताते रहे हैं। पहली बार फोटो और वीडियो सामने आने से चर्चा बढ़ी है। यह दृश्य बताता है कि प्रकृति अब भी जीवित है। अब सवाल है क्या हम इसे बचा पाएंगे?
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें

