दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। समाज में अक्सर दुआएं देने वाले और दूसरों की खुशियों में शरीक होने वाले किन्नर समाज ने नर्मदापुरम में मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। यहाँ किन्नर समाज ने न केवल एक लावारिस बच्ची को पाल-पोषकर बड़ा किया, बल्कि हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उसका विवाह संपन्न कराकर उसे एक नया घर और खुशहाल भविष्य भी दिया।
नर्मदापुरम में आयोजित इस विवाह समारोह में भव्यता का नजारा देखने को मिला। लाखों रुपये खर्च कर आयोजित इस शादी में हिंदू धर्म की सभी रस्मों का पूरी श्रद्धा से पालन किया गया। समाज ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार बिटिया के लिए किसी भी चीज की कमी नहीं रहने दी। विदाई के समय जहाँ एक ओर बेटी का घर बसने की खुशी थी, वहीं वर्षों से उसे सीने से लगाकर रखने वाली किन्नर मांओं की आँखों में जुदाई का दर्द भी साफ़ झलक रहा था।
किन्नर नेहा ने बताया कि यह बच्ची उन्हें बहुत छोटी उम्र में मिली थी। उसके जैविक माता-पिता उसे छोड़कर चले गए थे और आज तक उनका कोई अता-पता नहीं है। किन्नर गुरुओं के मार्गदर्शन में समाज ने इस बच्ची को अपनी ‘बिटिया’ मानकर बड़े नाजों और जतन से पाला। गुरु गौरी दीदी के अनुसार, उनके गुरु के समय से ही इस बच्ची की परवरिश पूरे किन्नर समाज द्वारा मिल-जुलकर की जा रही थी। इस नेक कार्य में नर्मदापुरम के स्थानीय नागरिकों ने भी अपना सहयोग दिया। विवाह समारोह में हजारों लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम में पहुंचे समाजसेवी पंकज शर्मा ने कहा कि किन्नर समाज का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। इससे न केवल मानवता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा। शादी के बाद पूरे क्षेत्र में किन्नर समाज के इस सेवा भाव की चर्चा हो रही है। आज इस बिटिया की विदाई ने यह साबित कर दिया कि रिश्ते केवल खून के नहीं, बल्कि प्यार और परवरिश के भी होते हैं।
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