नूंह जिले में शिक्षा विभाग की सख्ती और 'बायोमेट्रिक मॉडल' (Biometric Model) के लागू होने से सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल रही है। समय पर न आने वाले शिक्षक अब अनुशासित हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति (Attendance) में सुधार हुआ है।

सोनू वर्मा, नूंह। जिले में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) राजेंद्र शर्मा ने एक बड़ी पहल की है। लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते, जिससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा था। अब जिले के सभी सरकारी स्कूलों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस (Biometric Attendance) को अनिवार्य कर दिया गया है। इस डिजिटल हाजिरी के डर और अनुशासन के कारण शिक्षक अब समय के पाबंद हो गए हैं, जिसका सीधा फायदा गांव के गरीब बच्चों को मिल रहा है।

सुविधाओं में सुधार और धर्मगुरुओं का साथ

सिर्फ हाजिरी ही नहीं, बल्कि स्कूलों के बुनियादी ढांचे को भी दुरुस्त किया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी स्कूल में बिजली, पानी या शौचालय की कमी मिली, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई होगी। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभाग अब स्थानीय धर्मगुरुओं की मदद भी ले रहा है। ये लोग गांव-गांव जाकर अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं कि वे अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराएं। अधिकारियों की टीमें लगातार औचक निरीक्षण कर रही हैं ताकि लापरवाही की गुंजाइश न रहे।

नए सत्र के लिए खास अपील

प्रशासन की इस कोशिश से स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर हुआ है और बच्चे वापस क्लासरूम की तरफ लौट रहे हैं। डीईओ राजेंद्र शर्मा ने अभिभावकों से अपील की है कि वे आने वाले शैक्षणिक सत्र 2026-27 में भारी संख्या में बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूलों में कराएं। मेवात में शुरू हुआ यह ‘बायोमेट्रिक मॉडल’ अब शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगा रहा है, जिससे आने वाले समय में जिले का साक्षरता ग्राफ और भी बेहतर होने की संभावना है।